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Prit
tum wahaan kabhi jo beemaar hote ho jaanaan
tum wahaan kabhi jo beemaar hote ho jaanaan | तुम वहाँ कभी जो बीमार होते हो जानाँ
- Prit
तुम
वहाँ
कभी
जो
बीमार
होते
हो
जानाँ
हालतें
यहाँ
मेरी
भी
ख़राब
होती
हैं
- Prit
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इतनी
पाकीज़गी
से
इश्क़
किया
जिस
सेे
था
उसको
तक
ख़बर
न
हुई
Prit
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तेरे
हिज्र
में
मेरा
मरना
भी
तय
है
बिना
पानी
के
कौन
ज़िंदा
बचा
है
Prit
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जितनी
जल्दी
फ़िदा
हो
जाते
हैं
उतनी
जल्दी
जुदा
हो
जाते
हैं
मैं
तो
पत्थर
भी
हो
नहीं
पाता
लोग
कैसे
ख़ुदा
हो
जाते
हैं
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Prit
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मुझ
सेे
ये
मत
पूछ
कि
मैं
कितना
तन्हा
हूँ
तन्हाई
भी
साथ
नहीं
इतना
तन्हा
हूँ
Prit
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शायद
उसने
कभी
वफ़ा
की
ही
नइँ
जो
ये
कहता
है
आँखें
बोलती
नइँ
किसी
पे
इक
दफ़ा
दिल
आ
जाए
बंदा
क्या
फिर
तो
रब
की
चलती
नइँ
तेरी
ख़ामोशी
भी
सुनी
मैं
ने
तू
ने
आवाज़
भी
मेरी
सुनी
नइँ
घर
से
दफ़्तर
तलक
सफ़र
है
सिर्फ़
मौत
है
जानी
फिर
ये
ज़िंदगी
नइँ
उसको
कैसे
बुरी
लगी
मेरी
बात
बात
भी
वो
कभी
जो
मैं
ने
की
नइँ
उसे
बिन
देखें
देख
लेते
हैं
हम
वो
हमें
देखकर
भी
देखती
नइँ
आप
कुछ
ज़्यादा
अपने
आप
से
हैं
वरना
मुझ
में
तो
कोई
भी
कमी
नइँ
कभी
चुप
रह
के
कितना
कहती
है
कभी
वो
बोलकर
भी
बोलती
नइँ
'प्रीत'
आज़ादी
ऐसी
जैसे
हो
क़ैद
क़ैद
ऐसी
जहाँ
गिरफ़्तगी
नइँ
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Prit
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