aankh men ashk bhi bachaana hai | आँख में अश्क भी बचाना है

  - Naresh sogarwal 'premi'
आँखमेंअश्कभीबचानाहै
रोनाहैख़ुदकोहीसतानाहै
ख़ुदकोइतनाभीतोबचानाहै
हिज्रकोहँसनाभीसिखानाहै
रोनानइँहैकिसीकेभीआगे
ग़मतुझेइतनाभीबुझानाहै
दिनकोवोरोज़डूबजाताहै
चाँदकोबे-अजलबुलानाहै
पैसेकास्रोतगरमुझेहोजाए
हिज्रकोठीकसेमनानाहै
होमुलाक़ातगरकभीउससेे
जिस्मज़ख़्मोंकायेदिखानाहै
गोयामैंरोज़मरसाजाताहूँ
किसीदिनमरकेभीदिखानाहै
  - Naresh sogarwal 'premi'
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