yaad aa.e to phir kidhar jaaun | याद आए तो फिर किधर जाऊँ

  - Naresh sogarwal 'premi'
यादआएतोफिरकिधरजाऊँ
कैसेदिलसेतिरेउतरजाऊँ
मेराजोदिलथादेदियातुझको
ख़ालीपैकरलिएकिधरजाऊँ
चिट्ठियाँमैंनेतुझकोलिक्खीबहुत
परख़तोंसेमैंबे-ख़बरजाऊँ
रोज़शबओसमेंनहातेहैंग़म
सुब्हहोतेहीमैंनिखरजाऊँ
मेरेमाज़ीकीयादआतीहैबहुत
वक़्तठहरेतोबाहेंभरजाऊँ
आँखोंमेंमेरीएकदहशतहै
ख़्वाबकेग़मसेकैसेभरजाऊँ
चारा-गरकापताबताओमैं
टूटेदिलकोलिएकिधरजाऊँ
आजकीशबजुदाईकीशबहै
आजकीरातमैंभीमरजाऊँ
  - Naresh sogarwal 'premi'
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