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Prasoon
kisi be-naam rishte ko naya ik naam dene se
kisi be-naam rishte ko naya ik naam dene se | किसी बे-नाम रिश्ते को नया इक नाम देने से
- Prasoon
किसी
बे-नाम
रिश्ते
को
नया
इक
नाम
देने
से
बिखर
जाती
हैं
कुछ
नज़्में
फ़क़त
उनवान
देने
से
- Prasoon
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उसने
हँसते
हुए
तोड़ा
था
हमारा
रिश्ता
हम
सभी
को
ये
बताते
हुए
रो
देते
हैं
Zubair Alam
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जिस
लब
के
ग़ैर
बोसे
लें
उस
लब
से
'शेफ़्ता'
कम्बख़्त
गालियाँ
भी
नहीं
मेरे
वास्ते
Mustafa Khan Shefta
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रिश्तों
की
दलदल
से
कैसे
निकलेंगे
हर
साज़िश
के
पीछे
अपने
निकलेंगे
Shakeel Jamali
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धूप
भी
आराम
करती
थी
जहाँ
अपना
ऐसी
छाँव
से
नाता
रहा
Madan Mohan Danish
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दिल
की
ख़ातिर
एक
रिश्ते
को
बचाने
के
लिए
आग
मैंने
ही
लगा
ली
ख़ुद
मिरे
घरबार
में
Shashank Shekhar Pathak
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उसको
भी
उसकी
बाँहों
में
सोना
होगा
सोना
ही
है
रिश्तों
की
भी
मजबूरी
है
Umesh Maurya
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टूटते
रिश्तों
से
बढ़कर
रंज
था
इस
बात
का
दरमियाँ
कुछ
दोस्त
थे,
और
दोस्त
भी
ऐसे,
के
बस
Renu Nayyar
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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हमारे
घर
के
रिश्तों
में
अभी
बारीकियाँ
कम
हैं
भतीजा
मार
खाता
है
तो
चाचा
बोल
देते
हैं
Nirbhay Nishchhal
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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बस
उदासी
की
कमी
हो
दिल
मिरे
जा
जहाँ
तेरी
ख़ुशी
हो
दिल
मिरे
जा
यहाँ
की
तीरगी
से
दूर
जा
जा
जहाँ
पर
रौशनी
हो
दिल
मिरे
आब
आँखों
से
बहा
देना
कि
जब
आग
सीने
में
लगी
हो
दिल
मिरे
दर्द
के
सारे
शजर
शादाब
हों
चाक
की
सूरत
हरी
हो
दिल
मिरे
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Prasoon
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मैं
तुम्हारी
दस्तरस
से
दूर
हूँ
ख़्वाब
हूँ,आँखों
के
बस
से
दूर
हूँ
इश्क़
ही
से
राबता
रक्खा
फ़क़त
इसलिए
अब
तक
हवस
से
दूर
हूँ
है
गुमाँ
अब
भी
मोहब्बत
का
उसे
मैं
मोहब्बत
के
क़फ़स
से
दूर
हूँ
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Prasoon
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दिल
कहे
है
वार
मुझ
को
तिश्नगी
पे
हार
मुझ
को
हाल
है
नाशाद
मेरा
देख
ले
इक
बार
मुझ
को
नाख़ुदा
तू
डर
गया
है
दे
ज़रा
पतवार
मुझ
को
चाँद
तारे
जल
गए
हैं
देख
कर
इस
बार
मुझ
को
ये
तिरी
ख़ामोश
नज़रें
कर
गईं
बेज़ार
मुझ
को
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भला
कैसे
वफ़ा
के
तौर
हैं
ये
भला
कैसी
हमारी
दोस्ती
है
Prasoon
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जीत
का
जज़्बा
दिखाने
के
लिए
लड़
रहा
हूँ
हार
जाने
के
लिए
बेसबब
आँखों
में
मत
आया
करो
तुम
फ़क़त
हो
याद
आने
के
लिए
तोड़
वो
दीवार
हम
तुम
मिल
गए
जो
रिवायत
थी
ज़माने
के
लिए
बेसबब
भी
कुछ
सबब
तो
चाहिए
आब
आँखों
से
बहाने
के
लिए
इश्क़
दरिया
में
सफ़ीना
क्यूँ
मिले
डूब
जा
तू
पार
पाने
के
लिए
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