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Prasoon
jeet ka jazba dikhaane ke li.e
jeet ka jazba dikhaane ke li.e | जीत का जज़्बा दिखाने के लिए
- Prasoon
जीत
का
जज़्बा
दिखाने
के
लिए
लड़
रहा
हूँ
हार
जाने
के
लिए
बेसबब
आँखों
में
मत
आया
करो
तुम
फ़क़त
हो
याद
आने
के
लिए
तोड़
वो
दीवार
हम
तुम
मिल
गए
जो
रिवायत
थी
ज़माने
के
लिए
बेसबब
भी
कुछ
सबब
तो
चाहिए
आब
आँखों
से
बहाने
के
लिए
इश्क़
दरिया
में
सफ़ीना
क्यूँ
मिले
डूब
जा
तू
पार
पाने
के
लिए
- Prasoon
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मैं
आख़िर
कौन
सा
मौसम
तुम्हारे
नाम
कर
देता
यहाँ
हर
एक
मौसम
को
गुज़र
जाने
की
जल्दी
थी
Rahat Indori
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मैं
सालों
बाद
जब
भी
गाँव
जाता
हूँ
लिए
पीपल
की
ठंडी
छाँव
जाता
हूँ
कहीं
मैली
न
हो
जाए
ये
जन्नत
मैं
माँ
के
पास
नंगे
पाँव
जाता
हूँ
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Ashok Sagar
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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सर्दी
और
गर्मी
के
उज़्र
नहीं
चलते
मौसम
देख
के
साहब
इश्क़
नहीं
होता
Moin Shadab
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हमारा
काम
तो
मौसम
का
ध्यान
करना
है
और
उस
के
बाद
के
सब
काम
शश-जहात
के
हैं
Pallav Mishra
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करती
है
तो
करने
दे
हवाओं
को
शरारत
मौसम
का
तकाज़ा
है
कि
बालों
को
खुला
छोड़
Abrar Kashif
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शदीद
प्यास
थी
फिर
भी
छुआ
न
पानी
को
मैं
देखता
रहा
दरिया
तिरी
रवानी
को
Shahryar
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यहाँ
तुम
देखना
रुतबा
हमारा
हमारी
रेत
है
दरिया
हमारा
Kushal Dauneria
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मैं
तुम्हारी
दस्तरस
से
दूर
हूँ
ख़्वाब
हूँ,आँखों
के
बस
से
दूर
हूँ
इश्क़
ही
से
राबता
रक्खा
फ़क़त
इसलिए
अब
तक
हवस
से
दूर
हूँ
है
गुमाँ
अब
भी
मोहब्बत
का
उसे
मैं
मोहब्बत
के
क़फ़स
से
दूर
हूँ
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Prasoon
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भला
कैसे
वफ़ा
के
तौर
हैं
ये
भला
कैसी
हमारी
दोस्ती
है
Prasoon
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दिल
कहे
है
वार
मुझ
को
तिश्नगी
पे
हार
मुझ
को
हाल
है
नाशाद
मेरा
देख
ले
इक
बार
मुझ
को
नाख़ुदा
तू
डर
गया
है
दे
ज़रा
पतवार
मुझ
को
चाँद
तारे
जल
गए
हैं
देख
कर
इस
बार
मुझ
को
ये
तिरी
ख़ामोश
नज़रें
कर
गईं
बेज़ार
मुझ
को
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Prasoon
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बेख़ुद-ओ-बेक़रार
हम
भी
थे
दर-ब-दर
अश्कबार
हम
भी
थे
उन
दिनों
दिल-फ़िग़ार
हम
भी
थे
एक
धुन
पर
सवार
हम
भी
थे
हम
उदासी
में
मुस्कुराते
थे
सो
फ़रेब-ए-बहार
हम
भी
थे
ता-दम-ए-मर्ग
ख़ाक-आलूदा
रेत
थे
या
ग़ुबार
हम
भी
थे
हम
पे
गो
इख़्तियार
था
सबका
लेक
बे-इख़्तियार
हम
भी
थे
हम
से
ऊबा
किया
जहाँ
सारा
सा'अत-ए-इंतज़ार
हम
भी
थे
दश्त-दर-दश्त
नाम
था
अपना
रक़्स
में
ता-ग़ुबार
हम
भी
थे
जिस
जगह
इश्क़
ने
किया
वहशत
ऐ
दिल-ए-दाग़दार
हम
भी
थे
हम
ने
अब्र-ए-रवाँ
को
रोका
था
सर-ब-सर
रेग़-ज़ार
हम
भी
थे
तू
ने
हम
को
कभी
नहीं
देखा
पर
सर-ए-रहगुज़ार
हम
भी
थे
सुब्ह
ने
भेद
सारे
खोल
दिए
सुब्ह
तक
बा-वक़ार
हम
भी
थे
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Prasoon
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इस
को
क्या
समझाना
जानाँ
दिल
तो
है
दीवाना
जानाँ
जब
ख़ुद
को
बिसराया
मैं
ने
तब
तुम
को
पहचाना
जानाँ
सारा
जग
ठुकराएगा
जब
तुम
मुझ
को
अपनाना
जानाँ
तुम
से
हिजरत
का
मतलब
है
चेहरे
का
मुरझाना
जानाँ
दर्द-ओ-ग़म
से
भर
जाना
है
ज़ख़्मों
का
भर
जाना
जानाँ
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