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Prasoon
main tumhaari dastaras se door hooñ
main tumhaari dastaras se door hooñ | मैं तुम्हारी दस्तरस से दूर हूँ
- Prasoon
मैं
तुम्हारी
दस्तरस
से
दूर
हूँ
ख़्वाब
हूँ,आँखों
के
बस
से
दूर
हूँ
इश्क़
ही
से
राबता
रक्खा
फ़क़त
इसलिए
अब
तक
हवस
से
दूर
हूँ
है
गुमाँ
अब
भी
मोहब्बत
का
उसे
मैं
मोहब्बत
के
क़फ़स
से
दूर
हूँ
- Prasoon
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मोहब्बत
में
नहीं
है
फ़र्क़
जीने
और
मरने
का
उसी
को
देख
कर
जीते
हैं
जिस
काफ़िर
पे
दम
निकले
Mirza Ghalib
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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चलो
करके
देखेंगे
इज़हार
अब
की
मुहब्बत
न
होगी
अदावत
तो
होगी
Tiwari Jitendra
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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इश्क़
का
था
खेल
केवल
दौड़
का
बन
के
बल्लेबाज़
शामिल
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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किसी
ने
प्यार
जताया
जता
के
छोड़
दिया
हवा
में
मुझको
उठाया
उठा
के
छोड़
दिया
किसे
सिखा
रहे
हो
इश्क़
तुम
नए
लड़के
ये
राग
हमने
मियाँ
गा
बजा
के
छोड़
दिया
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Vishnu virat
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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तिरी
याद
ने
इस्तियारे
दिखाए
सर-ए-दश्त
भी
अब्र-पारे
दिखाए
हमें
तो
तभी
डूब
जाना
पड़ा
जब
नदी
ने
थे
अपने
किनारे
दिखाए
चुभे
है
नज़र
को
मगर
दीदनी
है
ग़म-ए-यार
जो
भी
नज़ारे
दिखाए
मुहब्बत
में
इक
शब
अमावस
की
शब
थी
सो
इक
माह-रू
ने
सितारे
दिखाए
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Prasoon
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ता-दम-ए-मर्ग़
याद
आएगी
उस
ने
इस
तरह
बेवफाई
की
Prasoon
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जो
गुज़रती
उम्र
के
अहबाब
हों
नींद
के
साए
में
झुलसे
ख़्वाब
हों
चाक
की
सूरत
हरी
हो
दिल
मिरे
दर्द
के
सारे
शजर
शादाब
हों
हिज़्र
की
सारी
किताबों
को
पढ़ें
लोग
जो
याँ
वस्ल
को
बेताब
हों
ये
तक़ाज़े
हैं
जुनूँ
के
वास्ते
सब
गली
सहरा
नदी
बे-आब
हों
फिर
न
होगी
दीद
की
हसरत
हमें
गर
कई
चेहरे
तिरे
हम-ताब
हों
या
उसी
की
आग
में
जलते
रहें
या
उसी
दो-चश्म
में
ग़र्क़ाब
हों
नाज़
करना
उस
नदी
के
हुस्न
पर
जिस
नदी
के
सैकड़ों
पायाब
हों
रक़्स
तक
करना
नहीं
आता
हमें
किस
तरह
से
दश्त
में
सैराब
हों
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Prasoon
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भला
कैसे
वफ़ा
के
तौर
हैं
ये
भला
कैसी
हमारी
दोस्ती
है
Prasoon
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हमारे
बाद
सब
आए
यहाँ
पर
हमीं
ने
दश्त
को
वीरां
किया
था
Prasoon
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