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Prashant Sitapuri
yahii ek khwaahish bachi hai mere men
yahii ek khwaahish bachi hai mere men | यही एक ख़्वाहिश बची है मेरे में
- Prashant Sitapuri
यही
एक
ख़्वाहिश
बची
है
मेरे
में
कि
अब
कोई
ख़्वाहिश
नहीं
ज़िन्दगी
की
- Prashant Sitapuri
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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ज़ख़्म
जो
तुम
ने
दिया
वो
इस
लिए
रक्खा
हरा
ज़िंदगी
में
क्या
बचेगा
ज़ख़्म
भर
जाने
के
बाद
Azm Shakri
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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तुम्हें
भी
साँस
लेने
की
कमी
हो
तुम्हें
भी
ज़िंदगी
ठुकरा
के
जाए
Ambar
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न
लौटोगे
कभी
तुम
जानता
हूँ
ये
मेरी
ज़िंदगी
है
फ़िल्म
थोड़ी
SWAPNIL YADAV 'NIL'
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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दर्द
ऐसा
है
कि
जी
चाहे
है
ज़िंदा
रहिए
ज़िंदगी
ऐसी
कि
मर
जाने
को
जी
चाहे
है
Kaleem Aajiz
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हैं
उल्फ़त
में
कई
इनआम
लेकिन
वफ़ादारी
से
बेहतर
कुछ
नहीं
है
Prashant Sitapuri
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खुल
के
बता
रही
मेरे
चेहरे
की
ये
चमक
तस्वीर
मेरी
फोन
में
चूमी
गई
है
आज
Prashant Sitapuri
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है
यही
उलझन
,
यही
है
बेबसी
हम
कहाँ
को
और
जाएँ
किस
गली
दिन
गए
जब
थे
दिवाने
हम
तिरे
अब
नहीं
है
यार
कोई
तिश्नगी
सबको
नीचा
ही
दिखाना
है
उसे
और
कर
ही
क्या
सका
है
आदमी
उसको
भूलो
वो
पुरानी
बात
है
अब
तो
अच्छी
कट
रही
है
ज़िन्दगी
भाग
कर
आना
किसी
मैंदान
से
और
क्या
होगी
सिवाए
बुजदिली
जिस
तरह
देखा
है
मैंने
आपको
दुश्मनी
से
भी
बुरी
है
दोस्ती
'जौन'
पीछे
रह
गए
तो
क्या
हुआ
मैं
करूँगा
बात
सब
सेे
काम
की
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Prashant Sitapuri
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एक
एहसान
कीजिए
साहब
मुझको
हैरान
कीजिए
साहब
आप
सरकारी
महक
में
से
हैं
कुछ
परेशान
कीजिए
साहब
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Prashant Sitapuri
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फ़रेबी,
झूठ
कहती
जा
रही
है
मुझे
क्या
क्या
समझती
जा
रही
है
ये
सोंचा
था
पकड़
ली
रेत
मैंने
मगर
ये
तो
फिसलती
जा
रही
है
बचा
लो
यार
इस
दरियादिली
को
निगाहों
से
उतरती
जा
रही
है
भरोसा
क्या
करूँँ
मैं
ज़िन्दगी
का
ये
तो
बातें
बदलती
जा
रही
है
ज़हर
कैसा
हवा
में
घुल
गया
ये
मेरी
तबियत
बिगड़ती
जा
रही
है
तुम्हारे
बाद
मैं
भी
क्या
करूँँगा
सो
ये
अब
उम्र
ढलती
जा
रही
है
मेरे
हाँथो
में
छाले
पड़
गए
हैं
मगर
किस्मत
बदलती
जा
रही
है
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Prashant Sitapuri
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