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Prashant Sitapuri
hai yahii uljhan yahii hai bebasi
hai yahii uljhan yahii hai bebasi | है यही उलझन , यही है बेबसी
- Prashant Sitapuri
है
यही
उलझन
,
यही
है
बेबसी
हम
कहाँ
को
और
जाएँ
किस
गली
दिन
गए
जब
थे
दिवाने
हम
तिरे
अब
नहीं
है
यार
कोई
तिश्नगी
सबको
नीचा
ही
दिखाना
है
उसे
और
कर
ही
क्या
सका
है
आदमी
उसको
भूलो
वो
पुरानी
बात
है
अब
तो
अच्छी
कट
रही
है
ज़िन्दगी
भाग
कर
आना
किसी
मैंदान
से
और
क्या
होगी
सिवाए
बुजदिली
जिस
तरह
देखा
है
मैंने
आपको
दुश्मनी
से
भी
बुरी
है
दोस्ती
'जौन'
पीछे
रह
गए
तो
क्या
हुआ
मैं
करूँगा
बात
सब
सेे
काम
की
- Prashant Sitapuri
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इन
आँखों
से
तुम्हें
बच्चे
लगे
दिल
मुझे
तो
काँच
के
टुकड़े
लगे
दिल
है
सिर
पे
बोझ
जिसके
मुश्किलों
का
भला
उस
शख़्स
का
कैसे
लगे
दिल
किसी
को
दिल
मैं
अपना
क्या
ही
देता
मुझे
सब
ने
दिए
काँटे
लगे
दिल
उसे
भी
शौक़
है
दिल
तोड़ने
का
मेरी
भी
आरज़ू
उस
सेे
लगे
दिल
मेरी
हालत
जो
देखी
सो
हुआ
ये
कि
मुझको
देखकर
रोने
लगे
दिल
मुहब्बत
मुफ़्त
में
जो
मिल
गई
थी
तभी
शायद
उसे
सस्ते
लगे
दिल
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Prashant Sitapuri
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जिस
में
तुम
सब
भीग
रहे
थे
बारिश
अच्छी
बतलाकर
आँखों
के
आँसू
थे
सब
वो
कोई
बरसात
नहीं
थी
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Prashant Sitapuri
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अपनों
को
बचाना
है
इस
दौर
ए
वबा
में
तो
परहेज़
करें
लोगों
से
हाँथ
मिलाने
से
Prashant Sitapuri
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अगर
मौका
मिला
तो
एक
दिन
अख़बार
देखेंगे
सियाही
में
है
कितनी
झूठ
की
मिक़दार,
देखेंगे
Prashant Sitapuri
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हालात
अपने
क्या
कहें
इक
बद्दुआ
के
बाद
कुछ
यूँँ
हुआ
कि
कोई
दु'आ
कुछ
न
कर
सकी
Prashant Sitapuri
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