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Prashant Sitapuri
bahut KHush the aawaargi men
bahut KHush the aawaargi men | बहुत ख़ुश थे आवारगी में
- Prashant Sitapuri
बहुत
ख़ुश
थे
आवारगी
में
समझ
खा
गई
खुशियाँ
मेरी
- Prashant Sitapuri
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जाने
से
कोई
फ़र्क़
ही
उसके
नहीं
पड़ा
क्या
क्या
समझ
रहा
था
बिछड़ने
के
डर
को
मैं
Shariq Kaifi
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अपना
कंगन
समझ
रही
हो
क्या
और
कितना
घुमाओगी
मुझ
को
Zubair Ali Tabish
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फ़िक्र-ए-ईजाद
में
गुम
हूँ
मुझे
ग़ाफ़िल
न
समझ
अपने
अंदाज़
पर
ईजाद
करूँँगा
तुझ
को
Jaun Elia
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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महसूस
कर
रहा
था
उसे
अपने
आस
पास
अपना
ख़याल
ख़ुद
ही
बदलना
पड़ा
मुझे
Ameer Qazalbash
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इस
क़दर
हम
ख़ुश
रखेंगे
आपको
ससुराल
में
आपको
महसूस
होगा
जी
रहे
ननिहाल
में
दो
गुलाबों
की
तरह
है
दो
चमेली
की
तरह
फ़र्क़
बस
इतना
तुम्हारे
होंठ
में
और
गाल
में
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Tanoj Dadhich
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ख़ुद
को
इतना
जो
हवा-दार
समझ
रक्खा
है
क्या
हमें
रेत
की
दीवार
समझ
रक्खा
है
Haseeb Soz
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जो
तस्वीरें
साथ
में
खींची
जाती
हैं
वो
इक
दिन
तन्हा
महसूस
कराती
हैं
Vikram Gaur Vairagi
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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ये
नहीं
है
कि
वो
एहसान
बहुत
करता
है
अपने
एहसान
का
एलान
बहुत
करता
है
आप
इस
बात
को
सच
ही
न
समझ
लीजिएगा
वो
मेरी
जान
मेरी
जान
बहुत
करता
है
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Jawwad Sheikh
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अंदर
से
जो
भी
टूटा
है
बाहरस
खुलकर
हँसता
है
जो
मेरी
बात
समझता
हो
कोई
शख़्स
नहीं
ऐसा
है
मैंने
जो
भी
देखा
है
कल
मेरी
नजरों
का
धोखा
है
अब
बात
नहीं
पहले
जैसी
अब
मजबूरी
का
रिश्ता
है
सब
लोग
मेरे
बारे
में
क्यूँँ
कहते
हैं
लड़का
अच्छा
है
इक
दिन
मैं
जब
मर
जाऊँगा
देखेँ
कौन
यहाँ
रोता
है
तस्वीर
तेरी
,
ज़ाम
,
किताबें
बस
इतना
मेरा
कमरा
है
दिल
पर
जब
आ
बनती
है
तब
सब
कहते
हैं
दिल
बच्चा
है
ईद
चली
जाती
हो
जब
तुम
मेरा
चाँद
नहीं
दिखता
है
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Prashant Sitapuri
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हर
आदमी
से
पूछा
गया
मेरे
बारे
में
हर
आदमी
ने
ये
कहा
बंदा
सही
नहीं
Prashant Sitapuri
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जब
तलक
था
बाप
ज़िंदा
घर
में
भाई
एक
थे
उसके
जाते
ही
ज़मीं
पर
सबके
हिस्से
आ
गए
Prashant Sitapuri
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इस
ज़माने
के
तरीकों
से
सताया
तो
गया
है
ग़म
ज़ियादा
हैं
मगर
जाँ
मुस्कुराया
तो
गया
है
Prashant Sitapuri
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मुझको
नहीं
गिला
है
बदलने
का
कोई
भी
मैं
भी
तो
पहले
जैसा
था
वैसा
नहीं
रहा
Prashant Sitapuri
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