hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Prashant Sitapuri
mujhko nahin gilaa hai badlne ka koi bhi
mujhko nahin gilaa hai badlne ka koi bhi | मुझको नहीं गिला है बदलने का कोई भी
- Prashant Sitapuri
मुझको
नहीं
गिला
है
बदलने
का
कोई
भी
मैं
भी
तो
पहले
जैसा
था
वैसा
नहीं
रहा
- Prashant Sitapuri
Download Sher Image
वैसे
एक
शिकवा
था
तुम
सेे
अच्छा
छोडो
ईद
मुबारक
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
64 Likes
ग़म-ए-फ़ुर्क़त
का
शिकवा
करने
वाली
मेरी
मौजूदगी
में
सो
रही
है
Jaun Elia
Send
Download Image
125 Likes
ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
Read Full
Kazim Rizvi
Send
Download Image
5 Likes
काँटे
तो
ख़ैर
काँटे
हैं
इस
का
गिला
ही
क्या
फूलों
की
वारदात
से
घबरा
के
पी
गया
Saghar Siddiqui
Send
Download Image
27 Likes
वो
जिस
घमंड
से
बिछड़ा
गिला
तो
इस
का
है
कि
सारी
बात
मोहब्बत
में
रख-रखाव
की
थी
Ahmad Faraz
Send
Download Image
34 Likes
ज़िन्दगी
से
यही
गिला
है
मुझे
तू
बहुत
देर
से
मिला
है
मुझे
Ahmad Faraz
Send
Download Image
40 Likes
बैठ
कर
बात
की
और
जुदा
हो
गए
कोई
शिकवा
नहीं
कोई
झगड़ा
नहीं
Shariq Kaifi
Send
Download Image
31 Likes
लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
Send
Download Image
50 Likes
हम
को
अग़्यार
का
गिला
क्या
है
ज़ख़्म
खाएँ
हैं
हम
ने
यारों
से
Sahir Hoshiyarpur
Send
Download Image
20 Likes
न
कोई
गिला
है,
न
तुम
से
ख़फ़ा
है
ग़मे-दिल
की
अब
के
न
कोई
दवा
है
Sukeshini Budhawne
Send
Download Image
4 Likes
Read More
अगर
मौका
मिला
तो
एक
दिन
अख़बार
देखेंगे
सियाही
में
है
कितनी
झूठ
की
मिक़दार,
देखेंगे
Prashant Sitapuri
Send
Download Image
8 Likes
जिस
में
तुम
सब
भीग
रहे
थे
बारिश
अच्छी
बतलाकर
आँखों
के
आँसू
थे
सब
वो
कोई
बरसात
नहीं
थी
Read Full
Prashant Sitapuri
Send
Download Image
0 Likes
वैसे
तो
सब
कुछ
अच्छा
चलता
है
और
अचानक
फिर
मुर्दा
चलता
है
मैं
आगे
चलता
रहता
हूँ
लेकिन
मुझ
सेे
आगे
ये
रस्ता
चलता
है
जब
से
बिछड़े
हैं
हम
यारों
उस
सेे
दिल
जाने
दिल
में
क्या
क्या
चलता
है
वो
मान
रहा
है
गर
सारी
बातें
तो
ताज़े
इश्क़
में
इतना
चलता
है
हर
बार
अगर
मैं
ही
झुकता
हूँ
तो
एक
तरफ़
से
क्या
रिश्ता
चलता
है?
सीख
रहे
हो
तो
चालाकी
सीखो
ईमान
बहुत
ही
सस्ता
चलता
है
दो
चार
घड़ी
हम
हँस
लेते
हैं
पर
वक़्त
बुरा
ही
अब
ज़्यादा
चलता
है
मेरे
यार
मुहब्बत
की
बस्ती
में
अब
केवल
झूठ
का
सिक्का
चलता
है
ये
पेट
का
जादू
है
या
ताक़त
है
सब
भूखा
थकता
इंसा
चलता
है
Read Full
Prashant Sitapuri
Download Image
3 Likes
पूछा
था
किसी
ने
के
पंखे
से
लटकना
है
मैंने
ये
बताया
था
के
ऐसे
लटकते
हैं
Prashant Sitapuri
Send
Download Image
0 Likes
पहला
बोसा
देने
में
तो
हर
लड़की
ही
शरमाती
है
Prashant Sitapuri
Send
Download Image
3 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Shehar Shayari
Titliyan Shayari
Bimar Shayari
Chaahat Shayari
Alone Shayari