hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Subhadeep Chattapadhay
dharm ab kat chuka is jahaan men
dharm ab kat chuka is jahaan men | धर्म अब कट चुका इस जहाँ में
- Subhadeep Chattapadhay
धर्म
अब
कट
चुका
इस
जहाँ
में
तुम
ने
ही
तो
उसे
काटा
हर
दिन
- Subhadeep Chattapadhay
Download Sher Image
एक
मुसलसल
कोशिश
यह
बतलाती
है
छैनी
से
पर्वत
काटा
जा
सकता
है
Divy Kamaldhwaj
Send
Download Image
52 Likes
ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
Send
Download Image
44 Likes
गिरेगी
कौन
सी
छत
पे
ये
कब
किसे
मालूम
कटी
पतंग
हवाओं
के
इम्तिहान
में
है
Ghani Ejaz
Send
Download Image
25 Likes
जब
तक
है
डोर
हाथ
में
तब
तक
का
खेल
है
देखी
तो
होंगी
तुमने
पतंगें
कटी
हुई
Munawwar Rana
Send
Download Image
33 Likes
पतंग
ऐसे
नहीं
उड़ती
इसे
वैसे
उड़ाओ
तुम
वही
कहता
है
ये
अक्सर
जो
बस
चरखी
पकड़ता
है
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
11 Likes
उसे
लगता
रहा
बस
वक़्त
काटा
जा
रहा
है
पर
मुझे
बातों
ही
बातों
में
मुहब्बत
हो
गई
उस
सेे
Ravi 'VEER'
Send
Download Image
4 Likes
मैं
हूँ
पतंग-ए-काग़ज़ी
डोर
है
उस
के
हाथ
में
चाहा
इधर
घटा
दिया
चाहा
उधर
बढ़ा
दिया
Nazeer Akbarabadi
Send
Download Image
42 Likes
एक
काटा
राम
ने
सीता
के
साथ
दूसरा
वनवास
मेरे
नाम
पर
Nasir Shahzad
Send
Download Image
26 Likes
इक
दिए
से
बँध
गई
है
मेरी
साँस
की
रिदम,
इक
लकीर
पर
टिकी
है
मेरी
ज़िंदगी
की
डोर
Aves Sayyad
Send
Download Image
5 Likes
उम्र
भर
साँप
से
शर्मिंदा
रहे
ये
सुन
कर
जब
से
इंसान
को
काटा
है
तो
फन
दुखता
है
Munawwar Rana
Send
Download Image
29 Likes
Read More
आँख
में
तिरे
जो
ये
हमेशा
चेहरा
दिखता
है
मेरा
था
नहीं
कभी
वो
और
ही
किसी
का
है
Subhadeep Chattapadhay
Send
Download Image
1 Like
ज़रा
पेड़
को
और
सूखा
बना
दूँ
गरजते
दिखा
मेघ
भूखा
बना
दूँ
Subhadeep Chattapadhay
Send
Download Image
1 Like
मेरे
दर
खड़े
क्यूँँ
है
साथी
सभी
मेरे
मरने
की
ये
ख़बर
किसने
दी
Subhadeep Chattapadhay
Send
Download Image
1 Like
ज़िद
लिए
मैं
रहा
बैठा
हर
दिन
सामने
मेरे
चौराहा
हर
दिन
राह
पे
बैठा
आख़िर
मैं
कब
हूँ
आसमाँ
पर
ही
जा
बैठा
हर
दिन
जन्म
को
मरने
को
इक
मिला
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
ज़िंदा
हर
दिन
धर्म
अब
कट
चुका
इस
जहाँ
में
तुमने
ही
तो
उसे
काटा
हर
दिन
ख़ुद
ख़ुदा
डर
रहा
आने
को
अब
बढ़
रहा
बास
जो
डर
का
हर
दिन
Read Full
Subhadeep Chattapadhay
Download Image
1 Like
ग़ज़ल
में
यूँँ
ही
नाम
मैं
भर
गया
तिरा
नाम
ही
सिर्फ़
बन
पर
गया
यूँँ
खोजे
तू
ज़िंदा
मुझे
सब
जगह
मैं
तो
ज़िंदगी
से
ही
हूँ
डर
गया
हरा
पेड़
बचपन
की
ही
याद
है
समय
आते
ही
ये
भी
झड़
पर
गया
क़लम
को
घड़ी
सौंप
आराम
है
समय
पर
तिरा
नाम
लिख
कर
गया
ये
जो
ख़्वाब
था
पानी
सा
साफ़
था
कि
क़िस्मत
बुरी
पानी
सड़
मर
गया
Read Full
Subhadeep Chattapadhay
Download Image
1 Like
Read More
Vishal Singh Tabish
Iftikhar Arif
Jaleel Manikpuri
Haseeb Soz
Abhishar Geeta Shukla
Ibn E Insha
Nazeer Banarasi
Muneer Niyazi
Iftikhar Naseem
Iqbal Ashhar
Get Shayari on your Whatsapp
Ujaala Shayari
Gunaah Shayari
Dillagi Shayari
Emotional Shayari
Partition Shayari