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Subhadeep Chattapadhay
mere dar khade kyun hai saa
mere dar khade kyun hai saa | मेरे दर खड़े क्यूँँ है साथी सभी
- Subhadeep Chattapadhay
मेरे
दर
खड़े
क्यूँँ
है
साथी
सभी
मेरे
मरने
की
ये
ख़बर
किसने
दी
- Subhadeep Chattapadhay
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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अगर
साए
से
जल
जाने
का
इतना
ख़ौफ़
था
तो
फिर
सहर
होते
ही
सूरज
की
निगहबानी
में
आ
जाते
Azm Shakri
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तो
क्या
उसको
मैं
होंठों
से
बजाऊँ
तिरे
दर
पे
जो
घंटी
लग
गई
है
चराग़
उसने
मिरे
लौटा
दिए
हैं
अब
उसके
घर
में
बिजली
लग
गई
है
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Fahmi Badayuni
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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अस्ल
में
पाया
ही
'दानिश'
तब
उसे
जब
उसे
खोने
का
डर
जाता
रहा
Madan Mohan Danish
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मुझे
अब
तुम
से
डर
लगने
लगा
है
तुम्हें
मुझ
से
मोहब्बत
हो
गई
क्या
Jaun Elia
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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जल
गए
वो
सभी
जिनको
थी
इक
ज़बाँ
मैं
ही
क्यूँ
बच
गया
वो
मुझे
बोल
दो
Subhadeep Chattapadhay
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मुसाहिब
ने
मोहब्बत
लिख
दिया
बारिश
के
होने
पर
न
जाने
किस
सड़क
मुफ़लिस
गया
ढह
घुप्प
कोने
पर
Subhadeep Chattapadhay
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ग़ज़ल
में
यूँँ
ही
नाम
मैं
भर
गया
तिरा
नाम
ही
सिर्फ़
बन
पर
गया
यूँँ
खोजे
तू
ज़िंदा
मुझे
सब
जगह
मैं
तो
ज़िंदगी
से
ही
हूँ
डर
गया
हरा
पेड़
बचपन
की
ही
याद
है
समय
आते
ही
ये
भी
झड़
पर
गया
क़लम
को
घड़ी
सौंप
आराम
है
समय
पर
तिरा
नाम
लिख
कर
गया
ये
जो
ख़्वाब
था
पानी
सा
साफ़
था
कि
क़िस्मत
बुरी
पानी
सड़
मर
गया
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Subhadeep Chattapadhay
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धर्म
अब
कट
चुका
इस
जहाँ
में
तुम
ने
ही
तो
उसे
काटा
हर
दिन
Subhadeep Chattapadhay
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रह
गया
इस
ज़मीं
में
कहीं
तन्हा
मैं
थे
मरे
तुम
कहाँ
वो
मुझे
बोल
दो
Subhadeep Chattapadhay
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