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Subhadeep Chattapadhay
zid li.e main raha baitha har din
zid li.e main raha baitha har din | ज़िद लिए मैं रहा बैठा हर दिन
- Subhadeep Chattapadhay
ज़िद
लिए
मैं
रहा
बैठा
हर
दिन
सामने
मेरे
चौराहा
हर
दिन
राह
पे
बैठा
आख़िर
मैं
कब
हूँ
आसमाँ
पर
ही
जा
बैठा
हर
दिन
जन्म
को
मरने
को
इक
मिला
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
ज़िंदा
हर
दिन
धर्म
अब
कट
चुका
इस
जहाँ
में
तुमने
ही
तो
उसे
काटा
हर
दिन
ख़ुद
ख़ुदा
डर
रहा
आने
को
अब
बढ़
रहा
बास
जो
डर
का
हर
दिन
- Subhadeep Chattapadhay
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ज़मीं
मेरे
सज्दे
से
थर्रा
गई
मुझे
आसमाँ
से
पुकारा
गया
Siraj Faisal Khan
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आसमाँ
से
गरज
छेड़ती
है
हमें
एक
बारिश
में
भी
भीगे
थे
साथ
हम
Parul Singh "Noor"
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ये
आसमाँ
में
कोई
बुत
बैठा
भी
है
कि
नईं
या
हम
ज़मीं
के
लोग
यूँँ
ही
चीखते
हैं
बस
Siddharth Saaz
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चाँद
को
देखकर
ये
लगता
है
तुम
मेरी
जान
आसमान
में
हो
Shajar Abbas
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आसमाँ
ने
बंद
कर
लीं
खिड़कियाँ
अब
ज़मीं
में
उसकी
दिलचस्पी
नहीं
Rajesh Reddy
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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आज
बादल
के
सहारे
उसने
ख़त
भेजा
हमें
आसमाँ
क़ासिद
है
कैसा
लफ़्ज़
बरसाता
नहीं
Shan Sharma
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मैं
घंटों
आसमाँ
में
देखता
था
ज़मीं
को
पीठ
के
नीचे
लगा
के
Siddharth Saaz
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गुज़र
रहा
हूँ
किसी
ख़्वाब
के
इलाक़े
से
ज़मीं
समेटे
हुए
आसमाँ
उठाए
हुए
Aziz Nabeel
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मेरे
हुजरे
में
नहीं
और
कहीं
पर
रख
दो
आसमाँ
लाए
हो
ले
आओ
ज़मीं
पर
रख
दो
Rahat Indori
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मुसाहिब
ने
मोहब्बत
लिख
दिया
बारिश
के
होने
पर
न
जाने
किस
सड़क
मुफ़लिस
गया
ढह
घुप्प
कोने
पर
Subhadeep Chattapadhay
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रह
गया
इस
ज़मीं
में
कहीं
तन्हा
मैं
थे
मरे
तुम
कहाँ
वो
मुझे
बोल
दो
Subhadeep Chattapadhay
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धर्म
अब
कट
चुका
इस
जहाँ
में
तुम
ने
ही
तो
उसे
काटा
हर
दिन
Subhadeep Chattapadhay
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ग़ज़ल
में
यूँँ
ही
नाम
मैं
भर
गया
तिरा
नाम
ही
सिर्फ़
बन
पर
गया
यूँँ
खोजे
तू
ज़िंदा
मुझे
सब
जगह
मैं
तो
ज़िंदगी
से
ही
हूँ
डर
गया
हरा
पेड़
बचपन
की
ही
याद
है
समय
आते
ही
ये
भी
झड़
पर
गया
क़लम
को
घड़ी
सौंप
आराम
है
समय
पर
तिरा
नाम
लिख
कर
गया
ये
जो
ख़्वाब
था
पानी
सा
साफ़
था
कि
क़िस्मत
बुरी
पानी
सड़
मर
गया
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Subhadeep Chattapadhay
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जल
गए
वो
सभी
जिनको
थी
इक
ज़बाँ
मैं
ही
क्यूँ
बच
गया
वो
मुझे
बोल
दो
Subhadeep Chattapadhay
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