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Amanpreet singh
aaj ek dooje ko chhod jaana hai hamne
aaj ek dooje ko chhod jaana hai hamne | आज एक दूजे को छोड़ जाना है हमने
- Amanpreet singh
आज
एक
दूजे
को
छोड़
जाना
है
हमने
आओ
आख़िरी
बारी
शहर
साथ
में
देखें
Behr:
212
1222
212
1222
- Amanpreet singh
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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राब्ता
लाख
सही
क़ाफ़िला-सालार
के
साथ
हम
को
चलना
है
मगर
वक़्त
की
रफ़्तार
के
साथ
Qateel Shifai
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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भला
क्या
किसका
था
कैसा
हमारा
उसी
ने
छीना
है
सबका
हमारा
जो
टूटी
चूड़ियाँ
हाथों
की
उसकी
निकलने
ख़ुद
लगा
रोना
हमारा
ख़मोशी
ही
सुनाई
दे
दे
शायद
है
चेहरा
वैसे
भी
सहमा
हमारा
वहाँ
से
लौट
कर
आया
नहीं
वो
कबूतर
खो
गया
भेजा
हमारा
सुनो
मैं
जीत
कर
हारा
हूॅं
वैसे
किसी
ने
छीना
है
जीता
हमारा
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Amanpreet singh
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अब
इरादा
नहीं
किया
मैं
ने
कोई
वा'दा
नहीं
किया
मैं
ने
मात
उसकी
थी
खेल
में
फिर
भी
आगे
प्यादा
नहीं
किया
मैं
ने
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Amanpreet singh
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मुझे
यारों
निकालो
इस
जहाँ
से
अब
कहीं
ये
दिल
उसे
फिर
से
बुला
ना
ले
Amanpreet singh
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उसे
मुझ
सेे
शिकायत
एक
ये
भी
थी
मुझे
उस
सेे
मोहब्बत
ही
हुई
थी
क्यूँ
Amanpreet singh
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सोच
कर
तुझको
ही
सजाया
है
दिल
ज़मीं
पे
शजर
लगाया
है
जो
महक
है
गुलाब
के
अंदर
सारी
उस
जिस्म
की
ये
माया
है
आग
उसकी
भी
मिटती
जाती
है
जिस्म
पे
थूकने
वो
आया
है
बाग़
में
फूल
बन
के
बैठा
हूॅं
दिल
मेरा
तितलियों
पे
आया
है
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Amanpreet singh
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