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Parvez Zaami
jaanaan afsos meri mayyat par
jaanaan afsos meri mayyat par | जानाँ अफ़सोस मेरी मय्यत पर
- Parvez Zaami
जानाँ
अफ़सोस
मेरी
मय्यत
पर
थोड़ा
सा
तो
जता
दिया
होता
- Parvez Zaami
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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बातें
करो
तो
बोलती
है
बोलते
हो
तुम
बहुत
उसने
किनारे
पे
से
लहरें
देखी
गहराई
नहीं
100rav
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उतर
कर
आसमानों
से
ज़मीं
की
ख़ाक
पर
बैठो
ख़ुदा
ने
सब
सेे
ऊँची
आपको
मसनद
अता
की
है
Pawan mahabodhi
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शब
की
आग़ोश
में
महताब
उतारा
उस
ने
मेरी
आँखों
में
कोई
ख़्वाब
उतारा
उस
ने
Azm Shakri
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ज़िक्र
तुम्हारा
बहुत
ज़रूरी
इन
ग़ज़लों
में
जानेमन
चाय
बिना
अदरक
को
डाले
अच्छी
थोड़ी
बनती
है
Tanoj Dadhich
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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किस
तरह
मेरी
जान
ये
किरदार
बने
है
जो
तुझ
सेे
मिले
है
वो
तेरा
यार
बने
है
Vikram Gaur Vairagi
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मुझ
को
बीमार
करेगी
तिरी
आदत
इक
दिन
और
फिर
तुझ
से
भी
अच्छा
नहीं
हो
पाऊँगा
Rahul Jha
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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मैं
तो
मुद्दत
से
ग़ैर-हाज़िर
हूँ
बस
मेरा
नाम
है
रजिस्टर
में
याद
करती
हैं
तुझको
दीवारें
शक्ल
उभर
आई
है
पलस्तर
में
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Azhar Nawaz
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सोचता
हूँ
तिरे
अलावा
तो
ये
क़लम
मुझ
से
रूठ
जाती
है
Parvez Zaami
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इश्क़
का
कुछ
सिला
दिए
होते
क़ब्र
पर
गुल
चढ़ा
दिए
होते
शे'र
अपने
मक़ाम
तक
जाते
आप
गर
मुस्कुरा
दिए
होते
पर्दा
गर
मह-ज़बीं
उठा
देते
हम
ने
दीपक
बुझा
दिए
होते
रोज़-ए-महशर
हिसाब
देना
है
कुछ
सितम
तो
गिना
दिए
होते
यार
तस्कीन-ए-क़ल्ब
हो
जाती
कोई
तोहमत
लगा
दिए
होते
कार-गर
मेरी
मौत
हो
जाती
चंद
आँसू
बहा
दिए
होते
तीन
लफ़्ज़ों
की
बात
थी
'ज़ामी'
काश
हम
लब
हिला
दिए
होते
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Parvez Zaami
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तुम
को
मैं
बा-ख़िरद
समझता
था
तुम
तो
अच्छा
सा
मशवरा
देते
Parvez Zaami
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दिल-फ़िगारों
से
दोस्ती
कर
ली
यार
यारों
से
दोस्ती
कर
ली
वो
नहीं
आए
जब
शब-ए-वादा
चाँद-तारों
से
दोस्ती
कर
ली
जब
गुलों
से
नहीं
बनी
मेरी
ख़ार-ज़ारों
से
दोस्ती
कर
ली
काम
आएँगे
बाद-ए-मुर्दन
भी
दीन-दारों
से
दोस्ती
कर
ली
एक
दिन
तंग
आ
के
फूलों
से
मैंने
ख़ारों
से
दोस्ती
कर
ली
आ
गई
रास
दुनिया
भी
'ज़ामी'
दुनिया-दारों
से
दोस्ती
कर
ली
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Parvez Zaami
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जिन
की
मंज़िल
गुलाब
होती
है
उन
की
राहों
में
ख़ार
होते
हैं
Parvez Zaami
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