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Pankaj murenvi
jitne bhi hain achchhe hain sacche hain lekin
jitne bhi hain achchhe hain sacche hain lekin | जितने भी हैं अच्छे हैं सच्चे हैं लेकिन
- Pankaj murenvi
जितने
भी
हैं
अच्छे
हैं
सच्चे
हैं
लेकिन
फिर
भी
दो
एक
यार
पहले
से
कम
हैं
अब
- Pankaj murenvi
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हर
गीत
में
हर
बार
गाऊँगा
तुझे
अपनी
ग़ज़ल
में
गुनगुनाऊँगा
तुझे
तू
ईद
है
और
तू
ही
दीवाली
मेरी
मैं
हर
बरस
यूँँही
मनाऊँगा
तुझे
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Krishnakant Kabk
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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माँ-बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टंग
कर
मर
जाना
था
Shashwat Singh Darpan
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दूर
तक
छाए
थे
बादल
और
कहीं
साया
न
था
इस
तरह
बरसात
का
मौसम
कभी
आया
न
था
Qateel Shifai
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नापता
हूँ
मैं
ख़यालात
की
गहराई
को
कौन
समझेगा
मेरी
बात
की
गहराई
को
Charagh Sharma
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चारा-गर
तो
तभी
बचा
पाएँगे
ना
चारा-गर
की
जान
बचाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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मैं
कहता
हूँ
"सुनो
लड़की!
मुझे
कुछ
तुम
से
कहना
था"
वो
ऐसे
पूछती
है
फिर
मैं
सब
कुछ
भूल
जाता
हूँ
Shadab Asghar
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हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
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Alankrat Srivastava
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रहने
को
सदा
दहर
में
आता
नहीं
कोई
तुम
जैसे
गए
ऐसे
भी
जाता
नहीं
कोई
Kaifi Azmi
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सीने
लगाऊँ
ग़ैर
को
तो
पूछता
है
दिल
किसकी
जगह
थी
और
ये
सीने
पे
कौन
है
Ankit Maurya
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ऐसा
मकाँ
मिला
था
इश्क़
में
हमको
तो
न
रौशनी
को
खिड़की
न
ही
हवा
को
कुछ
Pankaj murenvi
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मिरी
बनाने
को
ज़िन्दगी
है
शमशान
आई
उसकी
यादें
करने
हमें
परेशान
आई
रहना
था
साथ
उम्र
भर
जिस
के
वो
भी
तो
कुछ
इक
दो
दिन
की
ही
बनके
मेहमान
आई
करनी
थी
लाखों
बातें
होंठों
को
मेरे
जिस
सेे
वो
आई
भी
तो
बेज़ुबान
आई
उधर
से
आता
है
उसका
ख़त
कोई
तो
फिर
मुझको
लगता
है
जैसे
पंकज
जान
आई
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Pankaj murenvi
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लोग
थोड़ी
सी
ज़रूरत
के
लिए
वोट
देते
हैं
मुसीबत
के
लिए
पूछते
हम
क्यूँ
नहीं
सरकार
से
लोग
लड़ते
क्यूँ
हैं
बिदअत
के
लिए
कर
दिए
सरकार
ने
बर्बाद
जो
घर
बनाए
थे
सुकूनत
के
लिए
क्या
मिरे
मंदिर
तिरी
क्या
मस्जिदें
यार
हैं
तो
सब
इबादत
के
लिए
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Pankaj murenvi
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ज़ख़्म
दिल
पर
जो
मुहब्बत
में
लगे
नाकामियों
के
उन
में
से
इक-आध
सिल
जाए
अगर
तुम
लौट
आओ
Pankaj murenvi
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मैं
कितना
दूर
था
पहले
मुहब्बत
में
तेरे
नज़दीक
आकर
सोचता
हूँ
ये
Pankaj murenvi
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