musafir hooñ thikaana chahta hooñ | मुसाफ़िर हूँ, ठिकाना चाहता हूँ

  - Neeraj Naveed
मुसाफ़िरहूँ,ठिकानाचाहताहूँ
दिलोंमेंआशियानाचाहताहूँ
मैंजुगनूहीसही,चाँदतारो!
अँधेरेकोमिटानाचाहताहूँ
मिलेगाजोमुक़द्दरमेंहै,परमैं
मुक़द्दरआज़मानाचाहताहूँ
ग़ज़ललिक्खीहैइकतेरेलिए,सो
तुझेमिलकरसुनानाचाहताहूँ
उदासीसेबहुतउकतागयामन
मैंखुलकरमुस्कुरानाचाहताहूँ
तुम्हारीयादतोजीनेदेगी
मैंतुमकोभूलजानाचाहताहूँ
  - Neeraj Naveed
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