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Navneet krishna
nazar ke saamne se phir
nazar ke saamne se phir | नज़र के सामने से फिर
- Navneet krishna
नज़र
के
सामने
से
फिर
नया
मंज़र
गया
है
दिल
लिए
जम्बील
हाथों
में
कहाँ
दर-दर
गया
है
दिल
- Navneet krishna
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शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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हम
तो
कुछ
देर
हँस
भी
लेते
हैं
दिल
हमेशा
उदास
रहता
है
Bashir Badr
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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दिल
मेरा
बेक़रार
सा
रहने
लगा
है
अब
सौ
सौ
अज़ाब
क़ल्ब
ये
सहने
लगा
है
अब
Navneet krishna
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ठोकर
लगेगी
और
गिरेंगे
हज़ार
बार
हटकर
चलेंगे
गर
कभी
अपनी
डगर
से
हम
नवनीत
अब
है
रौशनी
में
तीरगी
नेहाँ
डरने
लगे
हैं
आज
बहुत
ही
सहरस
हम
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Navneet krishna
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ज़ख़्मों
पे
ज़ख़्म
खाए
ज़माने
गुज़र
गए
पत्थर
भी
घर
में
आए
ज़माने
गुज़र
गए
मेरी
निगाह
अब
भी
उसी
सिम्त
है
मगर
खिड़की
पे
उसको
आए
ज़माने
गुज़र
गए
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Navneet krishna
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इक
सिलसिला
तवील
रहा
इंतिज़ार
का
अब
हाल
क्या
सुनाएँ
दिल-ए-
बेक़रार
का
Navneet krishna
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ज़मीं
पे
अगरचे
जवाँ
और
भी
हैं
हमारी
तरह
के
कहाँ
और
भी
हैं
तुम्हारी
नज़र
के
अलावा
भी
हमदम
ज़माने
में
तीर-ओ-कमाँ
और
भी
हैं
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Navneet krishna
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