कभी हम संग समझे थे जिन्हें दिल हैं

  - Muntazir suraj
कभीहमसंगसमझेथेजिन्हेंदिलहैं
किसीऔरकीकहानीमेंवोकामिलहैं
नहींशामिलहमारीज़िंदगीमेंजो
हमारीमन्नत-ओ-सज्दामेंशामिलहैं
आनेदेंजीमेंकोईगुमाँभीजो
अजबयेहैहमउनकेदिलमेंदाख़िलहैं
तवक़्क़ोथीतवज्जोहभीदेंगेहम
मगरदेखोकिजाँदेनेपेमाइलहैं
मक़ाम-ए-इश्क़हैइकऐसादरिया'श्रेय'
मुयस्सरजाँसहारेहैंसाहिलहैं
  - Muntazir suraj
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