कोई शिकन उस वक़्त भी झलके न उस रुख़्सार से

  - Muntazir suraj
कोईशिकनउसवक़्तभीझलकेउसरुख़्सारसे
येचाहताहूँमैंकिबसकाटेगलावोप्यारसे
अबइंतिहाभीकोईमेरीराहमेंहाइलनहीं
मैंआगेबढ़ताजारहाहूँइश्क़केमेयारसे
हमहैंजहाँकोईकिसीकाहोकेभीहोतानहीं
उम्मीदमेंहैंहममगरफिरभीविसाल-ए-यारसे
लाएगाफिरमुझकोचितातकबा-मशक्कतयेजहाँ
बोझाउठेगाहीनहींमेरेग़मोंकाचारसे
हमकोपताभीकबचलाहैगर्दिश-ए-अय्याममें
जिसवज्हहमसेबिछड़ाहैवोवक़्तकीरफ़्तारसे
ख़ुदकोसँभालूँमैंकिपोंछूँआँसूअपनेयारके
हालतमिरीदेखीनहींजातीमिरेग़म-ख़्वारसे
तब'श्रेय'उसनेमश्वरा-ए-इश्क़मुझसेमाँगकर
ऐसेकियाजैसेदवामाँगेकोईबीमारसे
  - Muntazir suraj
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