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Mohit Subran
ye jo daba dii tum ne KHabar aaj tv pe
ye jo daba dii tum ne KHabar aaj tv pe | ये जो दबा दी तुम ने ख़बर आज टीवी पे
- Mohit Subran
ये
जो
दबा
दी
तुम
ने
ख़बर
आज
टीवी
पे
तुम
क्या
समझते
हो
मुझे
इसकी
ख़बर
नहीं
- Mohit Subran
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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जाने
किस
ने
ये
अफ़वाह
उड़ाई
है
रो
लेने
से
जी
हल्का
हो
जाता
है
Syed Sarosh Asif
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किसी
से
इश्क़
करना
और
इस
को
बा-ख़बर
करना
है
अपने
मतलब-ए-दुश्वार
को
दुश्वार-तर
करना
Abbas Ali Khan Bekhud
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दोस्त
दिल
रखने
को
करते
हैं
बहाने
क्या
क्या
रोज़
झूटी
ख़बर-ए-वस्ल
सुना
जाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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हम
दो
बंदे
हैं
और
सिगरेट
एक
अब
ख़बर
होगी
दोस्ती
की
दोस्त
Muzdum Khan
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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क्या
ख़बर
कौन
था
वो,
और
मेरा
क्या
लगता
था
जिस
सेे
मिलकर
मुझे,
हर
शख़्स
बुरा
लगता
था
Tehzeeb Hafi
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न
इब्तिदा
की
ख़बर
है
न
इंतिहा
मालूम
रहा
ये
वहम
कि
हम
हैं
सो
वो
भी
क्या
मालूम
Fani Badayuni
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पूरा
करेंगे
होली
में
क्या
वादा-ए-विसाल
जिन
को
अभी
बसंत
की
ऐ
दिल
ख़बर
नहीं
Kalb-E-Hussain Nadir
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हौले-हौले
गुज़र
रहा
हूँ
मैं
वक़्त
से
पहले
मर
रहा
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
बस
बसर
की
हो
जिसने
एक
ऐसा
बशर
रहा
हूँ
मैं
फिर
वो
कोई
भी
शख़्स
क्यूँ
न
सही
हर
किसी
को
अखर
रहा
हूँ
मैं
जाने
क्या
सूझी
है
जो
शिद्दत
से
ख़ुद
को
बर्बाद
कर
रहा
हूँ
हाए
ये
सच
वहाँ
तबाही
रही
आज
तक
भी
जिधर
रहा
हूँ
मैं
न
गिनूँ
इस
जहान
को
फिर
तो
हर
जगह
कार-गर
रहा
हूँ
मैं
आख़िरश
क्या
है
वो
जो
खोया
नहीं
फिर
ये
किस
डर
से
डर
रहा
हूँ
मैं
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Mohit Subran
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प्यार
व्यार
और
नाटक
देखो
काम
कितना
है
एक
जिस्म
पाने
में
ताम-झाम
कितना
है
Mohit Subran
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ये
बात
भूलें
न
नेता
कि
आम
लोगों
ने
जभी
है
चाही
जो
सरकार
वो
गिरा
डाली
Mohit Subran
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मौत
से
कर
लो
दोस्ती
लोगों
फिर
किसी
दोस्त
की
ज़रूरत
नइँ
Mohit Subran
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मैं
ख़ुद
को
ढाल
नहीं
पाया
ढंग
में
इस
के
ये
दुनिया
वक़्त
से
कुछ
मेरे
आगे
की
निकली
Mohit Subran
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