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Mohit Subran
vahaañ u
vahaañ u | वहाँ ऊपर ख़ला में कहकशाँ में कौन रहता है
- Mohit Subran
वहाँ
ऊपर
ख़ला
में
कहकशाँ
में
कौन
रहता
है
फ़लक
के
पार
जो
है
उस
जहाँ
में
कौन
रहता
है
टहल
आए
हैं
वैसे
तो
बशर
हम
चाँद
तक
लेकिन
सवाल
अब
भी
वही
है
आसमाँ
में
कौन
रहता
है
- Mohit Subran
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कुछ
फ़र्क़
क्यूँँ
हो
मुझ
में
जो
रौशन
हुए
हैं
आप
जलता
नहीं
है
चाँद
सितारों
को
देखकर
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Tanoj Dadhich
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वहाँ
ईद
क्या
वहाँ
दीद
क्या
जहाँ
चाँद
रात
न
आई
हो
Shariq Kaifi
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ईद
के
बा'द
वो
मिलने
के
लिए
आए
हैं
ईद
का
चाँद
नज़र
आने
लगा
ईद
के
बा'द
Unknown
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चंद
ख़्वाबों
की
हाथा-पाई
में
नींद
कल
गिर
गई
थी
बिस्तर
से
Shiva awasthi
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पूछा
जो
उन
सेे
चाँद
निकलता
है
किस
तरह
ज़ुल्फ़ों
को
रुख़
पे
डाल
के
झटका
दिया
कि
यूँँ
Arzoo Lakhnavi
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यूँँ
न
कर
वस्ल
के
लम्हों
को
हवस
से
ता'बीर
चंद
पत्ते
ही
तो
तोड़े
हैं
शजर
से
मैं
ने
Khurram Afaq
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उस
चाँद
को
भी
रश्क
होता
था
उसी
को
देख
कर
मैं
भी
खुले
आकाश
में
तस्वीर
उसकी
चूमता
Ankit Yadav
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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यूँँ
तो
तेरे
सँवरने
पर
कोई
बंदिश
नहीं
है
जाँ
मगर
उस
चाँद
की
तौहीन
करना
ठीक
थोड़ी
है
Harsh saxena
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जो
कल
शब
से
तन्हा
था
कैसा
होगा
वो
निस्फ़
चाँद
अब
जाने
किस
का
होगा
ALI ZUHRI
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ज़बूँ-हाली
में
घुट-घुट
के
हँसी
धुँदला
गई
वर्ना
कभी
मैं
भी
बहारों
जैसे
खुल
के
मुस्कुराता
था
Mohit Subran
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इनको
है
मालूम
बूढ़ा
इनको
भी
होना
है
इक
दिन
वर्ना
ये
बच्चे
न
बूढ़ों
से
अदब
से
पेश
आएँ
Mohit Subran
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सफ़र
ज़मीं
का
तमाम
होगा
सफ़र
फ़लक
का
करूँँगा
मैं
भी
यही
तो
अब
इक
ख़ुशी
बची
है
कि
एक
दिन
तो
मरूँगा
मैं
भी
Mohit Subran
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उम्र
लग-भग
है
अब
ढही
जाती
इक
ख़लिश
दिल
में
पर
रही
जाती
एक
हद
होती
है
कि
सहने
की
अब
नहीं
ये
घुटन
सही
जाती
मन
को
भी
पढ़ने
की
करो
कोशिश
बात
हर
इक
नहीं
कही
जाती
कैसे
गुज़रेंगे
ख़ुश्कियों
के
दिन
ये
नमी
आँख
से
बही
जाती
तारी
रहती
ये
बे-ख़ुदी
लेकिन
ज़ेहन
से
मेरे
आगही
जाती
जो
कही
जा
चुकी,
सुनी
जा
चुकी
काश
वो
बात
अन-कही
जाती
बस
कि
नाम-ओ-निशान
मिट
जाए
अब
कि
ये
चाह
भी
रही
जाती
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Mohit Subran
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सुनता
है
भला
कौन
यहाँ
दर्द
किसी
का
मैं
ख़ुश
था
चलो
मेरी
परेशानी
को
पूछा
उस
वक़्त
इन
आँखों
में
मिरी
पानी
भर
आया
जब
शह्र
में
मुझ
से
किसी
ने
पानी
को
पूछा
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Mohit Subran
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