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Mohit Subran
bigaad dii hai ye jo ek zindagi main ne
bigaad dii hai ye jo ek zindagi main ne | बिगाड़ दी है ये जो एक ज़िन्दगी मैं ने
- Mohit Subran
बिगाड़
दी
है
ये
जो
एक
ज़िन्दगी
मैं
ने
इसे
बनाने
में
दो
ज़िन्दगी
लगेंगी
मुझे
- Mohit Subran
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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मज़हब
का
एंगल
लाते
हैं
दोनों
तबक़े
गर्माते
हैं
हिन्दू-मुस्लिम
लड़वाते
हैं
हिन्दू-मुस्लिम
लड़
जाते
हैं
केवल
दंगे
भड़काते
हैं
रोटी
ही
इस
की
खाते
हैं
रोज़
नया
इक
छोड़
शगूफ़ा
ये
लोगों
को
उलझाते
हैं
लिखते
हैं
इक
क़िस्सा
मिल
के
फिर
सब
चैनल
दोहराते
हैं
बात
नहीं
करते
मुद्दे
पे
बस
मुद्दे
से
भटकाते
हैं
सच्चाई
का
दावा
कर
के
झूठी
ख़बरें
फैलाते
हैं
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Mohit Subran
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क़दम-क़दम
पे
बिछी
हैं
तो
ठोकरें
केवल
गरीबों
के
लिए
इक
बद-दुआ
है
ये
दुनिया
Mohit Subran
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मुहब्बत
का
ज़र-ओ-दौलत
से
जब
भी
सामना
होगा
वो
कोई
दौर
हो
लेकिन
मुहब्बत
हार
जाएगी
Mohit Subran
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बहुत
मुश्किल
है
मैं
इस
सख़्त-हालत
से
निकल
पाऊँ
बहुत
मुमकिन
है
मैं
शायद
इसी
हालत
में
मर
जाऊँ
Mohit Subran
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झुका
के
सर
अदब
से
सुन
रहा
हूँ
इन
की
बक-बक
उठा
के
सर
कि
अब
बतला
ही
दूँ
क्या
कौन
हूँ
मैं
Mohit Subran
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