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Mohit Subran
jhuka ke sar adab se sun raha hooñ in kii bak-bak
jhuka ke sar adab se sun raha hooñ in kii bak-bak | झुका के सर अदब से सुन रहा हूँ इन की बक-बक
- Mohit Subran
झुका
के
सर
अदब
से
सुन
रहा
हूँ
इन
की
बक-बक
उठा
के
सर
कि
अब
बतला
ही
दूँ
क्या
कौन
हूँ
मैं
- Mohit Subran
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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समुंदर
में
भी
सहरा
देखना
है
मुझे
महफ़िल
में
तन्हा
देख
लेना
Aqib khan
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न
जाने
कब
से
इक
मतला
लिए
बैठा
हूँ
महफ़िल
में
तुम्हारा
ज़िक्र
कर
दे
कोई
तो
पूरी
ग़ज़ल
कर
लूँ
Harsh saxena
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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हाए
मैं
मुंतज़िर
तो
ऐसे
हूँ
जैसे
सब
कुछ
बदलने
वाला
है
Mohit Subran
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निकाला
बीच
से
जा
सकता
था
उस
बात
को
लेकिन
ग़लत-फ़हमी
बढ़ी
इतनी
दिलों
को
शक
से
भर
डाला
बहुत
छोटी
सी
कोई
बात
थी
जिस
पे
लड़े
थे
हम
मगर
उस
बात
ने
ही
दरमियाँ
सब
ख़त्म
कर
डाला
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Mohit Subran
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ये
कैसा
इम्तिहाँ
आख़िर
ये
कैसी
आज़माइश
है
समझ
में
आ
गया
है
सब
दिली
क्या
तेरी
ख़्वाहिश
है
अगर
तू
चाहता
है
ऐसा
तो
ले
होने
देता
हूँ
वगरना
जानता
हूँ
पहले
से
क्या
तेरी
साज़िश
है
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Mohit Subran
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शे'र
कहना
है
वो
फ़न
जो
जान-ए-मन
आसाँ
नहीं
'जौन'
ने
जब
ख़ून
थूका
तब
कहीं
ग़ज़लें
हुईं
Mohit Subran
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है
तबाही
वो
क़ुर्ब
में
मेरे
जो
है
रहता
तबाह
रहता
है
Mohit Subran
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