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Mohit Subran
she'r kehna hai vo fan jo jaan-e-man aasaan nahin
she'r kehna hai vo fan jo jaan-e-man aasaan nahin | शे'र कहना है वो फ़न जो जान-ए-मन आसाँ नहीं
- Mohit Subran
शे'र
कहना
है
वो
फ़न
जो
जान-ए-मन
आसाँ
नहीं
'जौन'
ने
जब
ख़ून
थूका
तब
कहीं
ग़ज़लें
हुईं
- Mohit Subran
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हैरान
इस
क़दर
भी
हमपर
न
हों
ख़ुदारा
एक
शक़्स
बच
गया
है
नाराज़
कर
रहे
हैं
Jaani Lakhnavi
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तुम्हें
हरगिज़
ग़लत
समझे
न
कोई
रुको
मैं
बे-वफ़ाई
कर
रहा
हूँ
Shadab Javed
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अमीर
इमाम
के
अश'आर
अपनी
पलकों
पर
तमाम
हिज्र
के
मारे
उठाए
फिरते
हैं
Ameer Imam
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फिर
बालों
में
रात
हुई
फिर
हाथों
में
चाँद
खिला
Adil Mansuri
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ख़ुशी
में
भी
ख़ुशी
होती
नहीं
अब
तेरा
ग़म
ही
सतह
पर
तैरता
है
Umesh Maurya
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रहबर
भी
ये
हमदम
भी
ये
ग़म-ख़्वार
हमारे
उस्ताद
ये
क़ौमों
के
हैं
में'मार
हमारे
Unknown
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जी
नहीं
भरता
कभी
इक
बार
में
इश्क़
हम
ने
भी
दोबारा
कर
लिया
shaan manral
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बड़े
लोगों
से
मिलने
में
हमेशा
फ़ासला
रखना
जहाँ
दरिया
समुंदर
से
मिला
दरिया
नहीं
रहता
Bashir Badr
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हमें
पढ़ाओ
न
रिश्तों
की
कोई
और
किताब
पढ़ी
है
बाप
के
चेहरे
की
झुर्रियाँ
हम
ने
Meraj Faizabadi
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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जिरह
जब-जब
हुई
इतिहास
को
लेकर
बदल
तब-तब
गया
भूगोल
दुनिया
का
Mohit Subran
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हाए
मैं
मुंतज़िर
तो
ऐसे
हूँ
जैसे
सब
कुछ
बदलने
वाला
है
Mohit Subran
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दिखे
ग़ुस्से
में
जो
दरिया
तो
उस
से
दूर
ही
रहना
उफनते
दरिया
का
ख़ुद
पे
कभी
क़ाबू
नहीं
रहता
Mohit Subran
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मज़हब
का
एंगल
लाते
हैं
दोनों
तबक़े
गर्माते
हैं
हिन्दू-मुस्लिम
लड़वाते
हैं
हिन्दू-मुस्लिम
लड़
जाते
हैं
केवल
दंगे
भड़काते
हैं
रोटी
ही
इस
की
खाते
हैं
रोज़
नया
इक
छोड़
शगूफ़ा
ये
लोगों
को
उलझाते
हैं
लिखते
हैं
इक
क़िस्सा
मिल
के
फिर
सब
चैनल
दोहराते
हैं
बात
नहीं
करते
मुद्दे
पे
बस
मुद्दे
से
भटकाते
हैं
सच्चाई
का
दावा
कर
के
झूठी
ख़बरें
फैलाते
हैं
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Mohit Subran
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अँधेरा
हो
उजाला
हो
वो
चेहरा
याद
आता
है
कभी
मौसम
निराला
हो
वो
चेहरा
याद
आता
है
किसी
लड़की
ने
बेहद
ही
सलीक़े
से
गले
में
जो
दुपट्टा
यार
डाला
हो
वो
चेहरा
याद
आता
है
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Mohit Subran
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