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Manoj Devdutt
tarbiyat hamko mohabbat kii nahin milti hai
tarbiyat hamko mohabbat kii nahin milti hai | तर्बियत हमको मोहब्बत की नहीं मिलती है
- Manoj Devdutt
तर्बियत
हमको
मोहब्बत
की
नहीं
मिलती
है
बस
तभी
दिल
एक
लड़की
का
दुखाते
हैं
हम
- Manoj Devdutt
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
Shamsul Hasan ShamS
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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तूफ़ान
के
निशान
रह
गए
हैं
मलबे
नुमा
मकान
रह
गए
हैं
ओले
पड़े
तभी
यहाँ
सभी
फिर
रोते
हुए
किसान
रह
गए
हैं
बेटी
को
ही
पढ़ाना
था
उसको
दो
ख़ाली
माँ
के
कान
रह
गए
हैं
फल
तो
कभी
मिला
नहीं
हमको
हिस्से
में
इम्तिहान
रह
गए
हैं
इंसानियत
सभी
की
मर
गई
है
मुर्दा
यहाँ
जहान
रह
गए
हैं
चाहत
तो
मार
दी
गई
है
यहाँ
नफ़रत
के
ख़ानदान
रह
गए
हैं
घर
इसलिए
बिखर
रहा
था
एक
दो
भाई
में
गुमान
रह
गए
हैं
माँ
बाप
को
निकालते
ही
घर
में
ख़ाली
मर्तबान
रह
गए
हैं
क्यूँँ
बोलते
नहीं
मनोज
ये
लोग
सब
बनके
बे-ज़बान
रह
गए
हैं
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Manoj Devdutt
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मेरी
आँखों
में
कैसा
दर्द
हो
रहा
है
लगता
है
कि
बिछड़कर
मुझ
सेे
वो
रो
रहा
है
क्यूँ
अब
मुझको
दिन
में
ही
नींद
आ
रही
है
वो
रातों
को
जगकर
दिन
में
ही
सो
रहा
है
जिसने
मुझको
सुख
देने
की
ही
ठानी
थी
वो
जीवन
में
फसलें
दुख
की
ही
बो
रहा
है
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Manoj Devdutt
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रीत
अब
तो
बदल
गई
आगे
लड़की
निकल
गई
गोल्ड
मेडल
नहीं
दिखे
पर
फटी
जीन्स
खल
गई
बात
बेटी
की
मान
ली
सो
ख़ुशी
से
उछल
गई
फेल
लड़का
हुआ
जहाँ
उस
जगह
लड़की
चल
गई
कच्ची
मिट्टी
थी
पहले
जो
ईंट
में
अब
बदल
गई
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Manoj Devdutt
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एक
दुल्हन
की
तरह
अब
वो
सजा
दी
डोली
में
फिर
लाश
ज़िन्दा
इक
बिठा
दी
Manoj Devdutt
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हारना
मैं
कभी
जानता
ही
नहीं
लेके
घर
से
पता
जीत
का
निकला
हूँ
Manoj Devdutt
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