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Manoj Devdutt
meri aankhoñ men kaisa dard ho raha hai
meri aankhoñ men kaisa dard ho raha hai | मेरी आँखों में कैसा दर्द हो रहा है
- Manoj Devdutt
मेरी
आँखों
में
कैसा
दर्द
हो
रहा
है
लगता
है
कि
बिछड़कर
मुझ
सेे
वो
रो
रहा
है
क्यूँ
अब
मुझको
दिन
में
ही
नींद
आ
रही
है
वो
रातों
को
जगकर
दिन
में
ही
सो
रहा
है
जिसने
मुझको
सुख
देने
की
ही
ठानी
थी
वो
जीवन
में
फसलें
दुख
की
ही
बो
रहा
है
- Manoj Devdutt
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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रात
भर
दर्द
की
शम्अ
जलती
रही
ग़म
की
लौ
थरथराती
रही
रात
भर
Makhdoom Mohiuddin
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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ये
मयख़ाने
में
बैठ
अफ़सोस
अब
क्यूँ
तेरे
हिस्से
भी
तो
जवानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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उस
हिज्र
पे
तोहमत
कि
जिसे
वस्ल
की
ज़िद
हो
उस
दर्द
पे
ला'नत
की
जो
अशआ'र
में
आ
जाए
Vipul Kumar
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तुम्हारी
याद
के
जब
ज़ख़्म
भरने
लगते
हैं
किसी
बहाने
तुम्हें
याद
करने
लगते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िन्दगी
पर
लिख
दिया
था
नाम
मैंने
राम
का
और
फिर
दुख
के
समुंदर
पार
सारे
हो
गए
Tanoj Dadhich
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यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
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स्पैशलिस्ट
पेन-किलर
दे
तो
कौन
सा?
''सारे
जहाँ
का
दर्द
हमारे
जिगर
में
है''
Sarfaraz Shahid
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हमारी
उम्र
के
लड़के
ग़ज़ल
तो
लिख
रहे
हैं
पर
ये
इतना
दर्द
लेके
जी
रहे
हैं
ठीक
थोड़ी
है
Ramesh Singh
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सच
जब
कड़वा
होता
है
तो
फिर
कड़वा
ही
लगेगा
झूठ
छलावा
अच्छा
होता
है
अच्छा
ही
लगेगा
Manoj Devdutt
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तेरी
ख़ातिर
मैं
भी
गदर
मचा
दूँगा
क्या
ख़बर
थी
की
इस
क़दर
मचा
दूँगा
Manoj Devdutt
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झूठे
दिखाई
दे
रहे
हैं
अब
फिर
भी
सफ़ाई
दे
रहे
हैं
अब
जिन
मुल्ज़िमों
को
क़ैद
रखना
था
उनको
रिहाई
दे
रहे
हैं
अब
उम्मीद
जिनसे
थी
वफ़ा
की
ही
वो
बे-वफ़ाई
दे
रहे
हैं
अब
जो
दर्द
ही
देते
रहे
मुझको
अब
वो
दवाई
दे
रहे
हैं
अब
ता'रीफ़
की
आदत
लगी
उनको
सच
कब
सुनाई
दे
रहे
हैं
अब
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Manoj Devdutt
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आग़ोश
में
तू
ले
मुझे
सब
दर्द
अपने
दे
मुझे
जब
तू
रहेगी
पास
तो
कुछ
लोग
समझेंगे
मुझे
जब
भी
मुसीबत
उसपे
हो
तो
आगे
बस
रक्खे
मुझे
चाहत
मेरी
भी
ये
रही
तू
भी
कभी
ढूँडे
मुझे
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Manoj Devdutt
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वो
कहते
हैं
पैसा
कुछ
भी
नहीं
मैं
कहता
हूँ
ऐसा
कुछ
भी
नहीं
तुम
बन
जाती
हो
रानी
जैसी
मुझ
में
राजा
जैसा
कुछ
भी
नहीं
जब
मैं
पूछूँ
क्या
है
हमारे
बीच
तो
कहती
है
वैसा
कुछ
भी
नहीं
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Manoj Devdutt
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