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Manoj Devdutt
qazzaq thii vo do nigaahen to unhen to
qazzaq thii vo do nigaahen to unhen to | क़ज़्ज़ाक़ थी वो दो निगाहें तो उन्हें तो
- Manoj Devdutt
क़ज़्ज़ाक़
थी
वो
दो
निगाहें
तो
उन्हें
तो
सरकार
को
ही
बैन
रखना
चाहिए
था
- Manoj Devdutt
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इस
दौर-ए-सियासत
का
इतना
सा
फ़साना
है
बस्ती
भी
जलानी
है
मातम
भी
मनाना
है
Unknown
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कितना
दुश्वार
है
जज़्बों
की
तिजारत
करना
एक
ही
शख़्स
से
दो
बार
मोहब्बत
करना
जिस
को
तुम
चाहो
कोई
और
न
चाहे
उस
को
इस
को
कहते
हैं
मोहब्बत
में
सियासत
करना
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Liaqat Jafri
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मुल्क
तो
मुल्क
घरों
पर
भी
है
क़ब्ज़ा
उस
का
अब
तो
घर
भी
नहीं
चलते
हैं
सियासत
के
बग़ैर
Zia Zameer
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दो
मुल्कों
के
सियासी
खेल
में
जाने
यहाँ
पर
कितनों
के
घर
उजड़े
हैं
मौला
वही
हर
सुब्ह
मंज़र
देखना
पड़ता
हज़ारों
लोग
यूँँ
ही
मरते
हैं
मौला
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Harsh saxena
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सरकार
कहने
लग
गया
वो
सीधे
नाम
से
जो
हम-क़लाम
कम
था
मेरे
पहले
नाम
से
मुझ
सेे
बिछड़
के
अपना
कोई
नाम
रख
लियो
सब
लोग
जानते
हैं
तुझे
मेरे
नाम
से
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Rishabh Sharma
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मुक़ाबिल
फ़ासलों
से
ही
मोहब्बत
डूब
जाएगी
सुनोगी
झूठी
बातें
तुम
हक़ीक़त
डूब
जाएगी
चलेगी
तब
तलक
जब
तक
तिरी
परछाईं
देखेगी
तिरा
जब
हुस्न
देखेगी
सियासत
डूब
जाएगी
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Anurag Pandey
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बख़्शी
हैं
हम
को
इश्क़
ने
वो
जुरअतें
'मजाज़'
डरते
नहीं
सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ
से
हम
Asrar Ul Haq Majaz
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सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
Shakeel Jamali
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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सजा
दूँ
मांँग
मैं
तेरी
लहू
से
आज
मैं
अपने
बुरा
मानो
अगर
मेरे
न
तुम
सरकार,
होली
में
Shashank Shekhar Pathak
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उसने
अपना
नंबर
बदला
है
अब
पर
मेरा
पासवर्ड
तो
वो
ही
है
Manoj Devdutt
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दूर
थे
तो
क़रीब
थे
पास
आकर
बिछड़
गए
Manoj Devdutt
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मौसम
अभी
खुला
नहीं
है
ये
शायद
अभी
भी
सो
रही
है
वो
Manoj Devdutt
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बंद
खिड़की
खोलना
मुश्किल
है
सच
यहाँ
बोलना
मुश्किल
है
मुंसिफ़ों
की
आँख
पर
पट्टी
है
फिर
बराबर
तौलना
मुश्किल
है
पैर
में
बांधी
गई
है
बेड़ी
फिर
कहाँ
अब
डोलना
मुश्किल
है
हम
मोहब्बत
में
पड़े
हैं
जबसे
ख़ून
तबसे
खौलना
मुश्किल
है
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Manoj Devdutt
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घुटने
जवाब
दे
चुके
हैं
फिर
सब
हिसाब
दे
चुके
हैं
माँगी
दवा
ग़म-ए-मोहब्बत
फिर
सब
शराब
दे
चुके
हैं
लड़की
ज़रा
बड़ी
तभी
सब
उसको
नक़ाब
दे
चुके
हैं
कुछ
चाहिए
नहीं
ख़ुदास
वो
आफ़ताब
दे
चुके
हैं
बस
चाह
थी
शराब
की
पर
साथी
शबाब
दे
चुके
हैं
हकदार
अच्छे
शख़्स
की
थी
मुझ
सेा
ख़राब
दे
चुके
हैं
ज़िन्दा
मनोज
को
ख़ुदा
भी
कितने
अज़ाब
दे
चुके
हैं
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Manoj Devdutt
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