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Manoj Devdutt
ghutne javaab de chuke hain
ghutne javaab de chuke hain | घुटने जवाब दे चुके हैं
- Manoj Devdutt
घुटने
जवाब
दे
चुके
हैं
फिर
सब
हिसाब
दे
चुके
हैं
माँगी
दवा
ग़म-ए-मोहब्बत
फिर
सब
शराब
दे
चुके
हैं
लड़की
ज़रा
बड़ी
तभी
सब
उसको
नक़ाब
दे
चुके
हैं
कुछ
चाहिए
नहीं
ख़ुदास
वो
आफ़ताब
दे
चुके
हैं
बस
चाह
थी
शराब
की
पर
साथी
शबाब
दे
चुके
हैं
हकदार
अच्छे
शख़्स
की
थी
मुझ
सेा
ख़राब
दे
चुके
हैं
ज़िन्दा
मनोज
को
ख़ुदा
भी
कितने
अज़ाब
दे
चुके
हैं
- Manoj Devdutt
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किसी
के
ज़ख़्म
पर
चाहत
से
पट्टी
कौन
बाँधेगा
अगर
बहनें
नहीं
होंगी
तो
राखी
कौन
बाँधेगा
Munawwar Rana
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भटकती
रूहों
का
बोझ
कब
तक
कोई
उठाता
कहीं
ठहरता,पनाह
लेता,
तो
साथ
होता
मैं
जिस
'अक़ीदत
के
साथ
उसको
भुला
रहा
हूँ
उसी
'अक़ीदत
से
चाह
लेता,
तो
साथ
होता
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Armaan khan
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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कभी
चाहत
पे
शक
करते
हुए
ये
भी
नहीं
सोचा
तुम्हारे
साथ
क्यूँ
रहते
अगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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किसी
के
दिल
में
जगह
किस
तरह
बनानी
है
ये
सीखने
की
हो
चाहत
हमारे
शे'र
सुनो
Kashif Adeeb Makanpuri
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सजा
है
प्रेम
का
उपवन
तुम्हीं
से
हमारी
चाह
है
पावन
तुम्हीं
से
सभी
में
प्रेम
देखें
प्रेम
चाहें
मिली
है
ये
मुझे
चितवन
तुम्हीं
से
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Vikas Sahaj
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चाहत
में
मर
जाने
वाली
लड़की
हो
तुम
सचमुच
अफ़साने
वाली
लड़की
हो
आख़िरी
बैंच
पे
बैठने
वाला
लड़का
मैं
जाओ
तुम
अव्वल
आने
वाली
लड़की
हो
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Zubair Ali Tabish
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उड़
गए
सारे
परिंदे
मौसमों
की
चाह
में
इंतिज़ार
उन
का
मगर
बूढे
शजर
करते
रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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तुझको
छू
कर
और
किसी
की
चाह
रखें
हैरत
है
और
लानत
ऐसे
हाथों
पर
Varun Anand
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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पहले
मुझको
ख़लील
करता
है
फिर
मुझे
वो
ज़लील
करता
है
जानता
है
ग़लत
है
वो
फिर
भी
पेश
अपनी
दलील
करता
है
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Manoj Devdutt
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भीड़
काफ़ी
हो
गई
है
तेरे
दिल
में
अब
तो
बस
वहाँ
दम
घुट
रहा
था
तो
निकल
आया
हूँ
Manoj Devdutt
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ज़िद
से
बढ़े
हैं
फ़ासले
अब
जहाँ
सूने
हुए
फिर
घोंसले
तब
वहाँ
माँ
बाप
फिर
तो
पस्त
होते
गए
हैं
दूर
उन
सेे
हौंसले
अब
कहाँ
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Manoj Devdutt
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कई
दिन
से
सफ़ा
नहीं
हुई
है
छत
मगर
फिर
भी
ख़फ़ा
नहीं
हुई
है
छत
अलग
हर
बार
हो
रहें
हैं
ये
कमरे
अलग
पर
हर
दफ़ा
नहीं
हुई
है
छत
हमेशा
बे-वफ़ा
हुए
हैं
ये
कमरे
कभी
भी
बे-वफ़ा
नहीं
हुई
है
छत
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Manoj Devdutt
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घरों
से
निकले
जलाने
सब
कुछ
मदद
को
आगे
न
आया
कोई
Manoj Devdutt
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