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Manoj Devdutt
mausam abhii khula nahin hai ye
mausam abhii khula nahin hai ye | मौसम अभी खुला नहीं है ये
- Manoj Devdutt
मौसम
अभी
खुला
नहीं
है
ये
शायद
अभी
भी
सो
रही
है
वो
- Manoj Devdutt
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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ख़ुद
बुलाओ
के
वो
यूँँ
घर
से
नहीं
निकलेगा
यहाँ
इनाम
मुक़द्दर
से
नहीं
निकलेगा
ऐसे
मौसम
में
बिना
काम
के
आया
हुआ
शख़्स
इतनी
जल्दी
तेरे
दफ़्तर
से
नहीं
निकलेगा
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Khurram Afaq
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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मिरे
माँ
बाप
जन्नत
से
नज़र
रखते
हैं
मुझ
पर
अब
मिरे
दिल
में
यतीमों
के
लिए
इक
ख़ास
कोना
है
Amaan Pathan
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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मैं
आख़िर
कौन
सा
मौसम
तुम्हारे
नाम
कर
देता
यहाँ
हर
एक
मौसम
को
गुज़र
जाने
की
जल्दी
थी
Rahat Indori
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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यहाँ
तुम
देखना
रुतबा
हमारा
हमारी
रेत
है
दरिया
हमारा
Kushal Dauneria
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किताबें
हाथ
में
है
जिनके
बस
उन्हीं
से
बच
के
रहता
हूँ
अब
मैं
Manoj Devdutt
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मेरी
मज़ार
पर
अब
तुम
फूल
मत
चढ़ाओ
मरने
के
बाद
मेरे
ऐसे
न
तुम
सताओ
Manoj Devdutt
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साथ
चलना
ही
तो
कठिन
रहा
है
छोड़
जाना
आसान
है
हमेशा
Manoj Devdutt
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रिश्ते
बचाते
जा
रहा
हूँ
आँसू
बहाते
जा
रहा
हूँ
अब
ध्यान
सबका
ही
रखा
पर
ख़ुद
को
सताते
जा
रहा
हूँ
वो
पूछते
हैं
दर्द
मुझ
सेे
मैं
मुस्कुराते
जा
रहा
हूँ
हर
बार
अपनी
ज़ात
से
बस
मैं
मात
खाते
जा
रहा
हूँ
उसकी
मदद
करनी
है
मुझको
छिपते
छिपाते
जा
रहा
हूँ
मेरी
ख़ुशी
रूठी
हुई
है
उसको
मनाते
जा
रहा
हूँ
महताब
को
तस्वीर
तेरी
अब
मैं
दिखाते
जा
रहा
हूँ
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Manoj Devdutt
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ग़म
सभी
अपने
गवारा
करके
ख़ुश
थे
हम
तुझको
सितारा
करके
देखती
थी
वो
मुझे
पर
मैं
ही
तो
बुलाता
था
इशारा
करके
पूछता
है
वो
हमारी
मर्ज़ी
क़त्ल
पर
पहले
हमारा
करके
इश्क़
अब
इक
बार
कब
होता
है
देखना
तुम
भी
दुबारा
करके
साथ
ख़ुद
के
ख़ुश
नहीं
था
इतना
जितना
हूॅं
ख़ुद
को
तुम्हारा
करके
तुम
बनो
मेरा
सहारा
तो
मैं
ख़ुद
को
रखता
बे-सहारा
करके
है
ख़बर
होगा
नहीं
तेरे
बिन
फिर
भी
देखेंगे
गुजारा
करके
लौट
आऊँगा
जहन्नुम
से
मैं
तुम
बुलाना
बस
तुम्हारा
करके
दस्तरस
में
है
तेरे
अब
ये
देव
मस्त
रह
ग़म
से
किनारा
करके
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Manoj Devdutt
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