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Manoj Devdutt
rishte bachaate ja raha hooñ
rishte bachaate ja raha hooñ | रिश्ते बचाते जा रहा हूँ
- Manoj Devdutt
रिश्ते
बचाते
जा
रहा
हूँ
आँसू
बहाते
जा
रहा
हूँ
अब
ध्यान
सबका
ही
रखा
पर
ख़ुद
को
सताते
जा
रहा
हूँ
वो
पूछते
हैं
दर्द
मुझ
सेे
मैं
मुस्कुराते
जा
रहा
हूँ
हर
बार
अपनी
ज़ात
से
बस
मैं
मात
खाते
जा
रहा
हूँ
उसकी
मदद
करनी
है
मुझको
छिपते
छिपाते
जा
रहा
हूँ
मेरी
ख़ुशी
रूठी
हुई
है
उसको
मनाते
जा
रहा
हूँ
महताब
को
तस्वीर
तेरी
अब
मैं
दिखाते
जा
रहा
हूँ
- Manoj Devdutt
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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ऐसी
हैं
क़ुर्बतें
के
मुझी
में
बसा
है
वो
ऐसे
हैं
फ़ासले
के
नहीं
राब्ता
नसीब
Afzal Ali Afzal
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रिश्तों
को
जब
धूप
दिखाई
जाती
है
सिगरेट
से
सिगरेट
सुलगाई
जाती
है
Ankit Gautam
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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तुम्हारा
तो
ख़ुदास
राबता
है
तो
देखो
ना,
हमारे
दुख
बता
कर
Siddharth Saaz
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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कैसे
कहें
कि
तुझ
को
भी
हम
से
है
वास्ता
कोई
तू
ने
तो
हम
से
आज
तक
कोई
गिला
नहीं
किया
Jaun Elia
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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कुछ
ख़ास
तो
बदला
नहीं
जाने
से
तुम्हारे
बस
राब्ता
कम
हो
गया
फूलों
की
दुकाँ
से
Ashu Mishra
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दिन
बदले
साल
बदलते
हैं
कब
मेरे
हाल
बदलते
हैं
जब
से
कुछ
और
नहीं
बदला
बस
मेरे
साल
बदलते
हैं
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Manoj Devdutt
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मेरी
आँखों
में
कैसा
दर्द
हो
रहा
है
लगता
है
कि
बिछड़कर
मुझ
सेे
वो
रो
रहा
है
क्यूँ
अब
मुझको
दिन
में
ही
नींद
आ
रही
है
वो
रातों
को
जगकर
दिन
में
ही
सो
रहा
है
जिसने
मुझको
सुख
देने
की
ही
ठानी
थी
वो
जीवन
में
फसलें
दुख
की
ही
बो
रहा
है
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Manoj Devdutt
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बाप
के
कन्धे
पे
बेटे
का
जनाज़ा
है
नहीं
कोई
भी
दुख
इस
से
ज़ियादा
Manoj Devdutt
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पेड़
जो
ये
कटा
हुआ
है
अब
रोया
पंक्षी
ये
क्या
हुआ
है
अब
जो
नहीं
था
बुरा
किसी
का
भी
उसका
ही
क्यूँँ
बुरा
हुआ
है
अब
पहले
मेरी
दवा
हुआ
था
जो
क्यूँँ
मेरी
वो
सज़ा
हुआ
है
अब
मसअले
सब
सुलझ
गए
हैं
अब
कम
ये
फिर
मसअला
हुआ
है
अब
अच्छा
सब
कुछ
तेरा
हुआ
था
बस
सब
बुरा
फिर
मेरा
हुआ
है
अब
ख़ुश
नहीं
है
रक़ीब
से
भी
वो
ये
मुझे
भी
पता
हुआ
है
अब
दुश्मनी
भी
तो
इस
तरह
की
है
बैरी
से
राबता
हुआ
है
अब
बिछड़े
थे
हम
मनोज
पहले
ही
फ़ासला
बस
अदा
हुआ
है
अब
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Manoj Devdutt
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उसने
जब
से
हम
दोनों
को
जुदा
किया
है
फिर
कब
मैंने
उस
पत्थर
को
ख़ुदा
किया
है
उसको
नावों
की
सवारी
अच्छी
लगती
थी
बस
उसके
ख़ातिर
ख़ुद
को
नाख़ुदा
किया
है
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Manoj Devdutt
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