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Manish Yadav
ik aisa daur apni zindagi men tha zawaani men
ik aisa daur apni zindagi men tha zawaani men | इक ऐसा दौर अपनी ज़िंदगी में था ज़वानी में
- Manish Yadav
इक
ऐसा
दौर
अपनी
ज़िंदगी
में
था
ज़वानी
में
भुलाकर
दोस्तों
को
फिर
कमाना
ही
नज़र
आया
- Manish Yadav
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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ज़िंदगी
और
चल
नहीं
सकती
आने
पे
मौत
टल
नहीं
सकती
Afzal Sultanpuri
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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खेल
ही
तो
है
जहाँ
मैं
उसका
हूँ
ज़िन्दगी
ये
ट्वीट
बदलेगी
कभी
Neeraj Neer
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वो
मेरी
ज़िन्दगी
का
आख़िरी
ग़म
था
उसी
ने
मुझको
ख़ुश
रहना
सिखाया
है
Sapna Moolchandani
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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फिर
हुआ
है
वही
जिसका
डर
था
मुझे
अबकी
बारिश
जो
आई
तो
घर
ढह
गया
Manish Yadav
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कभी
तन्हाई
में
जानाँ
तिरी
ये
आँख
नम
हों
तो
मिरे
फिर
पास
आ
जाना
अगर
कोई
भी
ग़म
हो
तो
किसी
की
बात
मत
सुनना
भटक
जाओगे
दुनिया
में
हमारे
पास
आ
जाना
अगर
कोई
भरम
हो
तो
करो
कितनी
भी
तुम
कोशिश
कि
मुझ
सेे
दूर
हो
जाओ
मैं
चाहूँगा
तुम्हें
पाऊँ
दुबारा
फिर
जनम
हो
तो
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Manish Yadav
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बस
इतना
याद
रखना
इज़्ज़त
हो
तुम
किसी
की
जो
मेरे
साथ
गुज़री
तुम
उसको
भूल
जाना
Manish Yadav
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कि
अब
मैं
मुस्कुराना
चाहता
हूॅं
क़ज़ा
के
पास
जाना
चाहता
हूॅं
मिरे
दामन
को
कोई
थाम
ले
अब
मैं
ज़ख़्मों
को
भुलाना
चाहता
हूॅं
बनाया
घर
गया
मुझ
सेे
न
कोई
मैं
सबका
घर
गिराना
चाहता
हूॅं
कि
तुम
सेे
अब
निभा
सकता
नहीं
मैं
ये
बंधन
तोड़
जाना
चाहता
हूॅं
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Manish Yadav
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मुद्दतों
तक
समझ
नहीं
आया
अब
मुझे
इश्क़
पर
यक़ीं
आया
नींद
भी
अब
मुझे
नहीं
आती
तुम
मिले
तो
मुझे
यक़ीं
आया
वो
गया
जब
से
मेरी
यादों
से
लौट
कर
फिर
कभी
नहीं
आया
वो
ख़ुदा
अब
यहाँ
नहीं
मिलता
हाँ
किसी
को
दिखा
कहीं
आया
जब
कभी
ख़्वाब
आँख
में
आए
यूँँ
लगा
वो
ही
मह-जबीं
आया
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Manish Yadav
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