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Manish Yadav
muddaton tak samajh nahin aaya
muddaton tak samajh nahin aaya | मुद्दतों तक समझ नहीं आया
- Manish Yadav
मुद्दतों
तक
समझ
नहीं
आया
अब
मुझे
इश्क़
पर
यक़ीं
आया
नींद
भी
अब
मुझे
नहीं
आती
तुम
मिले
तो
मुझे
यक़ीं
आया
वो
गया
जब
से
मेरी
यादों
से
लौट
कर
फिर
कभी
नहीं
आया
वो
ख़ुदा
अब
यहाँ
नहीं
मिलता
हाँ
किसी
को
दिखा
कहीं
आया
जब
कभी
ख़्वाब
आँख
में
आए
यूँँ
लगा
वो
ही
मह-जबीं
आया
- Manish Yadav
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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कटती
है
आरज़ू
के
सहारे
पे
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
किसी
की
तमन्ना
न
चाहिए
Shaad Arfi
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कि
तुमको
देखने
के
बाद
यारा
तुम्हारे
ख़्वाब
सब
देखा
करेंगे
Kaviraj " Madhukar"
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न
सिर्फ़
ये
कि
जहन्नुम
ख़िताब
में
भी
नहीं
अली
के
मानने
वालों
के
ख़्वाब
में
भी
नहीं
Muzdum Khan
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ख़मोशी
मेरी
मअनी-ख़ेज़
थी
ऐ
आरज़ू
कितनी
कि
जिस
ने
जैसा
चाहा
वैसा
अफ़्साना
बना
डाला
Arzoo Lakhnavi
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जब
भी
कश्ती
मिरी
सैलाब
में
आ
जाती
है
माँ
दु'आ
करती
हुई
ख़्वाब
में
आ
जाती
है
Munawwar Rana
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बहाने
और
भी
होते
जो
ज़िंदगी
के
लिए
हम
एक
बार
तिरी
आरज़ू
भी
खो
देते
Majrooh Sultanpuri
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बढ़
के
इम्कान
से
नुक़्सान
उठाए
हुए
हैं
हम
मुहब्बत
में
बहुत
नाम
कमाए
हुए
हैं
मेरे
मौला
मुझे
ता'बीर
की
दौलत
दे
दे
मैंने
इक
शख़्स
को
कुछ
ख़्वाब
दिखाए
हुए
हैं
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Ejaz Tawakkal Khan
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गुलाब
ख़्वाब
दवा
ज़हर
जाम
क्या
क्या
है
मैं
आ
गया
हूँ
बता
इंतिज़ाम
क्या
क्या
है
Rahat Indori
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तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
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परेशाँ
है
वहाँ
वो
चाँद
भी
कब
से
हुआ
क्या
आज
तुम
छत
पर
नहीं
आए
Manish Yadav
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मिरे
दिल
में
पड़ा
चुपचाप
बच्चा
यकायक
आज
रोना
चाहता
है
Manish Yadav
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है
कुछ
तो
बात
उन
में
ख़ामोश
आजकल
हैं
टूटे
हुए
हैं
या
फिर
मदहोश
आजकल
हैं
सर
कट
रहें
हैं
देखो
मज़हब
के
नाम
पर
अब
हैरत
है
लोग
देखो
बेहोश
आजकल
हैं
है
काम
जिनका
सच
में
सच
को
हमें
बताना
डर
से
निज़ाम
के
वो
ख़ामोश
आजकल
हैं
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Manish Yadav
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वो
सर-गुज़श्त
कभी
उनकी
जो
पढ़ी
मैंने
मेरा
ही
नाम
न
आया
मेरी
कहानी
में
Manish Yadav
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सताते
हैं
ख़याल
अब
तेरे
सारा
दिन
गुज़र
जाती
है
यूँॅं
ही
रात
रोने
में
Manish Yadav
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