t'alluqaat ke imkaan maar deti hai | त'अल्लुक़ात के इमकान मार देती है

  - Manish Kumar Pathak
त'अल्लुक़ातकेइमकानमारदेतीहै
वोमेराहिज्रभीहँसकरगुज़ारदेतीहै
मैंइसलिएभीहरीफ़ोंकोभावदेताहूँ
हवादिएकेहुनरकोनिखारदेतीहै
नहींयेलाज़िमीहरजंगजीतनीहीहो
कईमौकोंपेशिकस्तीक़रारदेतीहै
बड़ेजतनसेमैंलबपरहँसीलेआताहूँ
तभीफ़सुर्दगीमुझकोपुकारदेतीहै
मरूथलोंकीसिफ़ारिशनहींसुनीजाती
हरेबनोंकोहीबदलीफुहारदेतीहै
कभीग़ुरूरजोहोताहैसब्ज़होनेका
ख़िज़ाँदरख़्तकानश्शाउतारदेतीहै
अगरगलेलगालेकोईहमरोदेतेहैं
दवाशिफ़ानहींदेतीबुख़ारदेतीहै
  - Manish Kumar Pathak
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