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Jaypratap chauhan
hazaaron gham tumhein lekin hamaara gham ziyaada hai
hazaaron gham tumhein lekin hamaara gham ziyaada hai | हज़ारों ग़म तुम्हें लेकिन हमारा ग़म ज़ियादा है
- Jaypratap chauhan
हज़ारों
ग़म
तुम्हें
लेकिन
हमारा
ग़म
ज़ियादा
है
हमें
तो
ख़ुद-कुशी
करनी
तुम्हारा
क्या
इरादा
है
ग़ज़ब
है
खेल
क़िस्मत
का
किसे
कब
क्या
बना
दे
ये
कभी
राजा
रहा
था
वो
वही
जो
अब
पियादा
है
वही
लड़का
ज़माने
की
नज़र
में
चोर
होता
था
वही
लड़का
अभी
देखो
बड़ा
ही
दिल
कुशादा
है
- Jaypratap chauhan
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जीत
हूँ
जश्न-ए-मुक़द्दर
हूँ
मैं
ठीक
से
देख
सिकंदर
हूँ
मैं
Ritesh Rajwada
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जो
मिल
गया
उसी
को
मुक़द्दर
समझ
लिया
जो
खो
गया
मैं
उस
को
भुलाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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मेरी
क़िस्मत
कि
ये
दुनिया
मुझे
पहचानती
है
लोग
मर
जाते
हैं
पहचान
बनाने
के
लिए
Nadeem Farrukh
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मैं
अब
तेरे
सिवा
किस
को
पुकारूँ
मुक़द्दर
सो
गया
ग़म
जागता
है
Asad Bhopali
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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परिंद
पेड़
से
परवाज़
करते
जाते
हैं
कि
बस्तियों
का
मुक़द्दर
बदलता
जाता
है
Asad Badayuni
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इस
बेवफ़ाई
पर
मुझे
हैरत
नहीं
तुझको
पा
लूँ
ऐसी
मिरी
क़िस्मत
नहीं
Harsh saxena
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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मोहब्बत
तुझपे
लानत
है
हक़ीक़त
है
मोहब्बत
तू
बग़ावत
है
हक़ीक़त
है
मोहब्बत
करने
वालों
को
नसीहत
है
मोहब्बत
बस
तिजारत
है
हक़ीक़त
है
मोहब्बत
कर
के
जाने
कितने
मर
बैठे
हक़ीक़त
है
हक़ीक़त
है
हक़ीक़त
है
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Jaypratap chauhan
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कौन
देगा
गवाही
मिरी
अब
यहाँ
कौन
मुझ
पे
भरोसा
करेगा
सनम
कोई
मेरा
नहीं
है
तुम्हारे
सिवा
कौन
मेरी
ज़मानत
भरेगा
सनम
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Jaypratap chauhan
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मेरा
नसीब
एक
वफ़ा
की
तरह
रहा
माँगी
बहुत
मगर
न
इनायत
मुझे
मिली
Jaypratap chauhan
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चाँदनी
के
सहारे
बड़े
शौक़
से
चमचमाते
हैं
तारे
बड़े
शौक़
से
भूक
जब
जब
लगी
जिस्म
की
जो
उन्हें
हमने
कपड़े
उतारे
बड़े
शौक़
से
दिल
हमारा
बहुत
क़ीमती
था
मगर
लुट
गया
दिन
दहाड़े
बड़े
शौक़
से
ज़िन्दगी
में
कभी
मात
खाए
नहीं
और
उन
सेे
थे
हारे
बड़े
शौक़
से
जिन
ख़तों
को
कभी
पास
रखती
थी
वो
एक
दिन
उसने
फाड़े
बड़े
शौक़
से
कल
तलक
तो
हमें
आप
जी
जी
कहा
आज
कहती
हो
जा
रे
बड़े
शौक़
से
जय
सुना
है
महीने
कई
तुमने
भी
बेबसी
में
गुज़ारे
बड़े
शौक़
से
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Jaypratap chauhan
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मोहब्बत
खा
गई
है
उम्र
मेरी
नहीं
तो
मैं
अभी
चौबीस
का
हूँ
Jaypratap chauhan
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