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Jaypratap chauhan
meraa naseeb ek vafaa ki tarah raha
meraa naseeb ek vafaa ki tarah raha | मेरा नसीब एक वफ़ा की तरह रहा
- Jaypratap chauhan
मेरा
नसीब
एक
वफ़ा
की
तरह
रहा
माँगी
बहुत
मगर
न
इनायत
मुझे
मिली
- Jaypratap chauhan
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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मेरा
क़ातिल
ही
मेरा
मुंसिफ़
है
क्या
मिरे
हक़
में
फ़ैसला
देगा
Sudarshan Fakir
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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मुझको
भी
ज़िद
करने
का
हक़
दो
साहब
मेरे
भीतर
भी
इक
बच्चा
रहता
है
Atul K Rai
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किसी
के
तुम
हो
किसी
का
ख़ुदा
है
दुनिया
में
मेरे
नसीब
में
तुम
भी
नहीं
ख़ुदा
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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यूँँ
ही
थोड़ी
मेरी
गज़लों
में
इतना
दुख
होता
है
इस
दुनिया
ने
हम
लड़कों
से
रोने
का
हक़
छीना
है
Harsh saxena
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न
हुआ
नसीब
क़रार-ए-जाँ
हवस-ए-क़रार
भी
अब
नहीं
तिरा
इंतिज़ार
बहुत
किया
तिरा
इंतिज़ार
भी
अब
नहीं
तुझे
क्या
ख़बर
मह-ओ-साल
ने
हमें
कैसे
ज़ख़्म
दिए
यहाँ
तिरी
यादगार
थी
इक
ख़लिश
तिरी
यादगार
भी
अब
नहीं
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Jaun Elia
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निगाह-ए-गर्म
क्रिसमस
में
भी
रही
हम
पर
हमारे
हक़
में
दिसम्बर
भी
माह-ए-जून
हुआ
Akbar Allahabadi
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ख़ैर-मक़्दम
है
आबिद
दु'आ
कीजिए
इक
दफ़ा
तो
हमारा
भला
कीजिए
ढूँढता
मैं
फिरूँ
आपको
दर
ब
दर
जब
कभी
इक
जगह
तो
मिला
कीजिए
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Jaypratap chauhan
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दिवाना
हमें
तुम
बनाकर
गए
हो
शब-ए-हिज्र
में
तुम
रुलाकर
गए
हो
सभी
के
लिए
बस
मोहब्बत
मज़ा
है
यही
तुम
बहाना
बनाकर
गए
हो
मिले
जो
मुझे
ग़म
सभी
कम
लगे
हैं
यही
ग़म
बहुत
तुम
जलाकर
गए
हो
किया
था
कभी
एक
वा'दा
सनम
जो
बड़ा
ख़ूब
उसको
निभाकर
गए
हो
नहीं
मानता
कोई
मुंसिफ़
तुम्हें
मैं
ग़लत
फ़ैसला
जो
सुनाकर
गए
हो
ख़ुशी
बाँटता
था
सभी
को
कभी
जय
मगर
तुम
उसे
भी
रुलाकर
गए
हो
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Jaypratap chauhan
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गुम-शुदा
और
बेकार
मैं
हो
गया
वो
गई
और
बीमार
मैं
हो
गया
इल्म
इक
भी
हुनर
का
नहीं
था
मुझे
वो
मिली
और
फ़नकार
मैं
हो
गया
खेल
खेला
नहीं
ज़िंदगी
से
कभी
इक
दफ़ा
खेलकर
हार
मैं
हो
गया
आज
ऐसा
जलाया
किसी
ने
मुझे
देख
कैसे
न
अंगार
मैं
हो
गया
मानते
थे
कभी
जो
मुझे
वो
ख़ुदा
लो
ग़ज़ब
आज
ख़ुद्दार
मैं
हो
गया
बस
लगाई
नहीं
थी
नशे
की
तलब
अब
नशे
का
तलबगार
मैं
हो
गया
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Jaypratap chauhan
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आख़िरी
शे'र
है
ये
मिरा
आख़िरी
बार
सुन
लो
मुझे
Jaypratap chauhan
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सभी
ये
पूछते
हैं
'जय'
कि
तुम
कैसे
बने
शायर
मिरे
इक
रात
सपने
में
सुनो
इक
जौन
आया
था
Jaypratap chauhan
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