dukhi hone lage jab ham ghazal kah dii | दुखी होने लगे जब हम ग़ज़ल कह दी

  - Vijay Anand Mahir
दुखीहोनेलगेजबहमग़ज़लकहदी
हुईआँखेंमिरीजबनमग़ज़लकहदी
नज़रआया,लगाअपना,मुझेकोई
बोले,गएघरहमग़ज़लकहदी
बिछड़केजारहाथादूरख़ुदसेमैं
तभीऐसाबनाआलमग़ज़लकहदी
टपकताथालबोंसेपानीबारिशका
बदनभीगा,हसींमौसमग़ज़लकहदी
उसेमालूमहोक्याहालमेराहै
लिखेसारे-के-सारेग़मग़ज़लकहदी
क़लमनेख़ूबफिरता'रीफ़की'माहिर'
कियाअच्छाजोयेहमदमग़ज़लकहदी
  - Vijay Anand Mahir
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