zindagi bas faqat hamaari hai | ज़िंदगी बस फ़क़त हमारी है

  - Lalit Mohan Joshi
ज़िंदगीबसफ़क़तहमारीहै
हमनेरोरोकेयेगुज़ारीहै
उसकीयादेंकहाँतलकढोते
यादअबउसकीयारभारीहै
मौतसेऐसेभागतेता-उम्र
साँसजैसेयहाँउधारीहै
जलरहाहैबदनयेआगमेंक्यूँँ
छारहीमनमेंबेक़रारीहै
ज़िंदगीमेंयूँँटूटतेहरदिन
अपनीहालतनहींसुधारीहै
गालियाँजिसकोदेरहेहोतुम
वोतोमंदिरकाइकपुजारीहै
वक़्तकीचोटआपसहतेहो
आपकोक्यूँयेशर्मसारीहै
दोस्तीजिसपरीसेहोगईथी
आजभीवोपरीकुँवारीहै
मुश्किलोंकोख़रीदताहैसब
ये'ललित'कीदुकानदारीहै
  - Lalit Mohan Joshi
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