nahin ab vo meri amaanat nahin hai | नहीं अब वो मेरी अमानत नहीं है

  - Lalit Mohan Joshi
नहींअबवोमेरीअमानतनहींहै
उसेमेरीअबतोज़रूरतनहींहै
तुम्हेंगरमैंचाहूँतोदिलसेहैचाहा
मेरीकोशिशोंमेंसियासतनहींहै
सजाऊँगाफूलोंसेअपनीग़ज़लको
हज़ाक़तयहींहैहिमाक़तनहींहै
सुनोशे'रपढ़करअंकुरबुलाया
सहीफिरतुम्हारीनिज़ामतनहींहै
आँखोंमेंजलवाचेहरेपेरौनक़
गईजोमुहब्बततोबरकतनहींहै
पड़ीसिलवटेंजोबदनमेंमेरेयूँँ
पतागरतुम्हेंहोशिकायतनहींहै
मैंटूटातोकोईसदातकआई
करूँँअबसदामैंयेताक़तनहींहै
वोघरजोबनाएथेमिट्टीमेंहमने
कहाँहैंयेपूछोतोफ़ुर्सतनहींहै
हमेंमहफ़िलोंमेंबुलातेनहींहो
येअच्छीतोकोईशरारतनहींहै
मुझेयादउसनेकियाकॉलकरके
मुझेऐसेछलकीज़रूरतनहींहै
वोट्विटरपेरोयाबहुतदेरतककल
सियासतहुईथीहक़ीक़तनहींहै
यहाँदर्दबाँटेकोईऐसालाओ
दवासेभीअबतोवोराहतनहींहै
घरोंकेहैरिश्तेलगेफ़ोनमेंहै
उन्हेंबातकरनेकीफ़ुर्सतनहींहै
कहाँगयाऔरक्यादेखताहूँ
यहाँजानकीकोईक़ीमतनहींहै
गलेमेंहोरस्सीकिसीवास्तेजो
यहाँमेरीऐसीतोआदतनहींहै
'ललित'क्याकरोगेयहाँबीचरहकर
तुम्हारीअगरकोईअज़मतनहींहै
  - Lalit Mohan Joshi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy