shikaayat se mujhe dekho ghire rahna yuñ padta hai | शिकायत से मुझे देखो घिरे रहना यूँँ पड़ता है

  - Lalit Mohan Joshi
शिकायतसेमुझेदेखोघिरेरहनायूँँपड़ताहै
ज़मानेकेमुझेअबतंजकोसहनायूँँपड़ताहै
नहींकोईउठाताहैजनाज़ाअबयहाँयारो
मुझेभीलाशकेअबसाथफिररहनायूँँपड़ताहै
नहींकुछपासकेइसउम्रभरकीचाकरीसेभी
हमेंबेबसहीदरियासंगअबबहनायूँँपड़ताहै
लगाहैलगनेसायाग़ैरभीअपनामगरफिरभी
हमेशाख़ुदकोख़ुदहीतोबुराकहनायूँँपड़ताहै
हमाराकौनहोजाएपरायाअपनाशायदफिर
हमेंऐसेभीकुछचुपयारअबरहनायूँँपड़ताहै
  - Lalit Mohan Joshi
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