dik rahi maazi kii ab parchaaiyaan | दिख रही माज़ी की अब परछाइयाँ

  - Lalit Mohan Joshi
दिखरहीमाज़ीकीअबपरछाइयाँ
क्यालगातीयादमेंवोहिचकियाँ
ऐसाकहनाभीग़लतहोगानहीं
मुझकोभातीहैंमेरीतन्हाइयाँ
मेरीक़िस्मतमेंहैरोनाइसक़दर
मिलरहीक्यूँअबमुझेरुसवाइयाँ
झीलवोजिसनेडरायाथामुझे
अबसदादेतीहैंवोगहराइयाँ
रोज़येग़लतीललितकरतारहा
क्यूँबुरेमेंढूँढताअच्छाइयाँ
  - Lalit Mohan Joshi
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