hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Lalit Mohan Joshi
main KHud se rootha aap se hargiz nahin
main KHud se rootha aap se hargiz nahin | मैं ख़ुद से रूठा आप से हरगिज़ नहीं
- Lalit Mohan Joshi
मैं
ख़ुद
से
रूठा
आप
से
हरगिज़
नहीं
अब
हिज्र
से
ही
दोस्ती
मेरी
यहाँ
- Lalit Mohan Joshi
Download Sher Image
वो
आ
रहे
हैं,
वो
आते
हैं,
आ
रहे
होंगे
शब-ए-फ़िराक़
ये
कह
कर
गुज़ार
दी
हम
ने
Faiz Ahmad Faiz
Send
Download Image
37 Likes
दूरी
हुई
तो
उन
सेे
क़रीब
और
हम
हुए
ये
कैसे
फ़ासले
थे
जो
बढ़ने
से
कम
हुए
Waseem Barelvi
Send
Download Image
87 Likes
दिल
अभी
पूरी
तरह
टूटा
नहीं
दोस्तों
की
मेहरबानी
चाहिए
Abdul Hamid Adam
Send
Download Image
29 Likes
हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
2 Likes
तड़पना
हिज्र
तक
सीमित
नहीं
है
उसे
दुल्हन
भी
बनते
देखना
है
Anand Verma
Send
Download Image
48 Likes
तुम
अपने
बारे
में
कुछ
देर
सोचना
छोड़ो
तो
मैं
बताऊँ
कि
तुम
किस
क़दर
अकेले
हो
Waseem Barelvi
Send
Download Image
58 Likes
उसकी
टीस
नहीं
जाती
है
सारी
उम्र
पहला
धोखा
पहला
धोखा
होता
है
Shariq Kaifi
Send
Download Image
35 Likes
वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
Send
Download Image
7 Likes
इक
तेरा
हिज्र
दाइमी
है
मुझे
वर्ना
हर
चीज़
आरज़ी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
45 Likes
या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
Read Full
Kushal Dauneria
Send
Download Image
64 Likes
Read More
आपके
मैं
ज़ुल्म
को
सहता
हुआ
आपको
मैं
छोड़
कर
चल
ही
दिया
आज
ख़ंजर
आँख
पर
मेरे
चला
वार
से
मैं
आपके
बच
ही
गया
Read Full
Lalit Mohan Joshi
Send
Download Image
3 Likes
गर
हवा
चलती
है
हक़
में
ही
नहीं
तो
क्या
करूँँ
मौत
को
भी
काम
पर
मैंने
लगा
रक्खा
यहाँ
Lalit Mohan Joshi
Send
Download Image
4 Likes
एक
दिन
मैं
यार
हो
बंजर
गया
इस
जहाँ
से
यार
जब
मैं
मर
गया
साँस
दिल
से
राब्ता
सब
तोड़कर
यार
तन्हा
तो
ज़ियादा
कर
गया
आँख
पर
तो
अश्क
आऍंगे
यहाँ
यार
उन
सेे
जाने
वो
क्यूँ
डर
गया
और
दो
दिन
शोक
भी
होगा
मेरा
जब
ख़ुदा
के
यार
जो
मैं
घर
गया
छोड़कर
सब
कुछ
यहाँ
मैं
बस
सुनो
याद
को
ज़िंदा
यहाँ
बस
कर
गया
संग
अपने
कुछ
भले
मैं
काम
लूॅं
राख
ख़ुद
बनके
यहाँ
तो
मर
गया
एक
दिन
मैं
काम
पर
जाकर
कहीं
फिर
नहीं
अब
लौटकर
जो
घर
गया
यार
लिखकर
ग़म
यहाँ
सबके
सुनो
अब
यहाँ
ख़ुद
को
अमर
भी
कर
गया
देखकर
मैं
भीड़
तेरे
शहर
की
हाथ
की
नस
काट
अब
मैं
मर
गया
इस
ज़माने
से
परेशाँ
जब
हुआ
तो
'ललित'
ख़ुद
क़त्ल
अपना
कर
गया
Read Full
Lalit Mohan Joshi
Download Image
3 Likes
क्या
ख़ुदा
ने
इसे
बनाया
है
रूह
ने
इक
लिबास
पहना
है
रूह
अपनी
बना
के
अच्छी
तुम
काम
बस
ये
करो
तो
अच्छा
है
है
ज़माना
ख़िलाफ़
मेरे
अब
जीत
में
क्यूँ
ये
मेरी
रोता
है
तल्ख़
बातों
को
आपकी
सहना
ये
हुनर
यार
मुझको
आता
है
उनकी
आदत
तमाश-बीं
जैसी
हो
बुरी
सब
मगर
ये
सहना
है
बे-वफ़ा
की
किताब
को
पढ़कर
इल्म
मुझको
वफ़ा
का
पढ़ना
है
आपकी
हर
ग़ज़ल
रवानी
हो
यानी
मौज़ूँ
ग़ज़ल
में
ज़िंदा
है
दूसरों
का
लिबास
कब
तक
हो
ख़ुद
को
पहना
करो
तो
अच्छा
है
अजनबी
इस
जहाँ
ने
अक्सर
ही
बस
ललित
को
यहाँ
रुलाया
है
Read Full
Lalit Mohan Joshi
Download Image
3 Likes
सभी
के
लिए
ख़ुद
तो
मैं
बट
गया
अकेले
ही
रस्ता
मेरा
कट
गया
करूँँ
कैसे
उसपे
भी
उम्मीद
अब
गले
मिल
वो
ग़ैरों
के
झटपट
गया
रहा
ढूँढ़ना
ख़ुद
को
हर
दिन
यहाँ
मगर
याद
को
उसकी
मैं
रट
गया
कोई
चूम
ले
काश
माथा
मेरा
मेरा
दर्द
बढ़
कैसे
झटपट
गया
Read Full
Lalit Mohan Joshi
Download Image
4 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Nigaah Shayari
Murder Shayari
Deedar Shayari
Subah Shayari
Sabr Shayari