maana raat siyaah andheri hai | माना रात सियाह अँधेरी है

  - Lalit Mohan Joshi
मानारातसियाहअँधेरीहै
परआनेवालीसुब्हअच्छीहै
थोड़ेग़मसेइतनामतडरना
इससेेआगेराहतुम्हारीहै
अपनेइल्मकोख़ूबबढ़ाओतुम
फिरदेखोयेदुनियातुम्हारीहै
चलनाशुरूकियाहैअभीसफ़र
फिरदेखोमहफ़िलयेहमारीहै
पहलेतुम्हेंकाँटोंपेचलनाहै
फिरफूलोंकीराहतुम्हारीहै
फ़ेलुनफ़ेकोसमझलियाहैअब
यानीबहर-ए-ग़ज़लहमारीहै
उर्दूहैदिलसबशायरोंकापर
हिंदीधड़कनयारहमारीहै
  - Lalit Mohan Joshi
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