bure is waqt ne jab aazmaaya hai | बुरे इस वक़्त ने जब आज़माया है

  - Lalit Mohan Joshi
बुरेइसवक़्तनेजबआज़मायाहै
तोख़ुदसेराब्तामैंनेनिभायाहै
ज़मानेमेंमुझेअक्सरमिलाहैदर्द
सोअपनेदर्दकोताक़तबनायाहै
ख़ुदापरहैभरोसाऔरख़ुदपरभी
यहीहथियारसेख़ुदकोसजायाहै
सलीक़ाज़िंदगीकासबपितासेहै
उन्हेंहरमुश्किलोंमेंसाथपायाहै
यहाँसबतल्ख़बातेंसुनकेमैंनेफिर
यूँँख़ुदमज़बूतदुनियाकोदिखायाहै
सबक़हरहारसेमुझकोमिलाऐसा
किअबहरहारकोगहनाबनायाहै
बिताकरउम्रकोमैंनेयहाँअक्सर
नएआयामकोहरदिनहीपायाहै
  - Lalit Mohan Joshi
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