husn ke uske na poochho yaar jalwe | हुस्न के उसके न पूछो यार जलवे

  - Lalit Mohan Joshi
हुस्नकेउसकेपूछोयारजलवे
लिखरहेहैंअबतोहरअख़बारजलवे
देखकरअबमैंपरेशाँहूँबहुतही
अबसॅंभलतेहैनहींबेकारजलवे
लाऊँहुस्न-ओ-इश्क़मैंतोअबकहाँसे
यारउसकेहैंयहाँहरबारजलवे
येतड़पभीअबनहींजातीमगरफिर
यूँँमोहब्बतकेतोहैंभरमारजलवे
सोचताहूँराब्ताउसहूरसेहो
फिरयहाँमेरेभीहोंदो-चारजलवे
फूँकदीजातीयहाँमुर्देमेंजाँभी
यारक्याक्याहोरहेसरकारजलवे
  - Lalit Mohan Joshi
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