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Divya 'Kumar Sahab'
sirf saansey hi nahin ye naam teraa hi chale
sirf saansey hi nahin ye naam teraa hi chale | सिर्फ़ साँसे ही नहीं ये नाम तेरा ही चले
- Divya 'Kumar Sahab'
सिर्फ़
साँसे
ही
नहीं
ये
नाम
तेरा
ही
चले
ख़ून
में
साँसे
नहीं
अब,
घोलते
हम
हैं
तुझे
- Divya 'Kumar Sahab'
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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क़त्ल
से
पहले
वो
हर
शख़्स
के
दिल
की
हसरत
पूछ
लेता
था
मगर
पूरी
नहीं
करता
था
Vishnu virat
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अश्क़-ओ-ख़ून
घुलते
हैं
तब
दीदा-ए-तर
बनती
है
दास्तान
इश्क़
में
मरने
से
अमर
बनती
है
Jaani Lakhnavi
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तेग़-बाज़ी
का
शौक़
अपनी
जगह
आप
तो
क़त्ल-ए-आम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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हम
नहीं
वो
जो
करें
ख़ून
का
दावा
तुझ
पर
बल्कि
पूछेगा
ख़ुदा
भी
तो
मुकर
जाएँगे
Sheikh Ibrahim Zauq
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मैं
क़त्ल
तो
हो
गया
तुम्हारी
गली
में
लेकिन
मिरे
लहू
से
तुम्हारी
दीवार
गल
रही
है
Javed Akhtar
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आप
दस्ताने
पहनकर
छू
रहे
हैं
आग
को
आप
के
भी
ख़ून
का
रंग
हो
गया
है
साँवला
Dushyant Kumar
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वफ़ा
का
ज़ोर
अगर
बाज़ुओं
में
आ
जाए
चराग़
उड़ता
हुआ
जुगनुओं
में
आ
जाए
खिराजे
इश्क़,
कहीं
जा
के
तब
अदा
होगा
हमारा
ख़ून
अगर
आँसुओं
में
आ
जाए
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Hashim Raza Jalalpuri
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हमीं
को
क़ातिल
कहेगी
दुनिया
हमारा
ही
क़त्ल-ए-आम
होगा
हमीं
कुएँ
खोदते
फिरेंगे
हमीं
पे
पानी
हराम
होगा
अगर
यही
ज़ेहनियत
रही
तो
मुझे
ये
डर
है
कि
इस
सदी
में
न
कोई
अब्दुल
हमीद
होगा
न
कोई
अब्दुल
कलाम
होगा
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Meraj Faizabadi
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अपने
ख़ून
से
इतनी
तो
उम्मीदें
हैं
अपने
बच्चे
भीड़
से
आगे
निकलेंगे
Shakeel Jamali
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वो
बस
हमारे
पास
बैठा
और
थामा
जब
हमें
अच्छी
भली
साँसों
को
फिर
हमने
अटकते
देखा
है
Divya 'Kumar Sahab'
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उसने
कहा
मुझ
सेे
यही
तुम
कुछ
नहीं
मेरे
लिए
आवाज़
ने
उसकी
कहा
कहना
इसे
कुछ
और
था
Divya 'Kumar Sahab'
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तेरे
बदले
मिल
जाए
दुनिया
फिर
भी
मुझको
घाटा
ये
सारी
दुनिया
मिट्टी
है,
तेरा
साथ
खज़ाना
है
Divya 'Kumar Sahab'
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आँखों
से
आँसू
चल
निकले
पन्नों
पर
फिर
काजल
बिखरे
सारे
के
सारे
ज्ञानी
थे
बस
हम
ही
थे
पागल
निकले
चंदा
उतरी
ग़ैरों
की
छत
छत
पर
मेरे
बादल
निकले
बस
बुझ
कर
ही
बैठे
थे
हम
चलते
ही
फिर
से
जल
निकले
ये
साँसें
तो
माला
सी
हैं
सुमरन
तेरा
हर-पल
निकले
अपनी
नज़रें
हम
पर
तो
कर
आतप
में
तब
आँचल
निकले
जो
राहें
थीं
ये
फूलों
सी
वाँ
पर
सारे
दलदल
निकले
तू
इतना
भी
बेबस
मत
कर
इस
दिल
से
फिर
हलचल
निकले
इक
मैं
हूँ
जो
आलस
में
हूँ
सपने
सारे
चंचल
निकले
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Divya 'Kumar Sahab'
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जितने
जुड़े
थे
ख़ून
से
वो
तो
सभी
रिश्ते
हुए
इसके
परे
वो
एक
रिश्ता
मित्रता
समझा
गई
Divya 'Kumar Sahab'
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