zamaana zakhm dekar poochta hai baat kya kuchh hai | ज़माना ज़ख़्म देकर पूछता है बात क्या कुछ है

  - Divya 'Kumar Sahab'
ज़मानाज़ख़्मदेकरपूछताहैबातक्याकुछहै
हँसीरौशनहैचेहरेपरमगरअंदरबुझाकुछहै
नज़रयेदेखतीकुछहैमगरमनसोचताकुछहै
नयनसेझाँकताहैसचमगरमुँहबोलताकुछहै
बिछड़करजानलोगेदूरीजितनीपासउतनेहो
गलेलगकरकिसीकेजानलोगेफ़ासलाकुछहै
मेरेकुछदोस्तलेकरगएमरहममोहब्बतका
लगायाजिस्मपरमरहममगरयेआत्माकुछहै
गिराहूँतोसमझतेहोकिमैंनेहारमानीहै
कटेहैंपंखमेरेपरअभीभीहौसलाकुछहै
  - Divya 'Kumar Sahab'
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