mohabbat men shikaayat ye musalsal ho nahin sakti | मोहब्बत में शिकायत ये मुसलसल हो नहीं सकती

  - Divya 'Kumar Sahab'
मोहब्बतमेंशिकायतयेमुसलसलहोनहींसकती
बिनातेरेमेरेदिलदेखहलचलहोनहींसकती
लड़ेजानेयहाँकितनेसमझताहीनहींकोई
मोहब्बतकोज़रासमझोवोमक़्तलहोनहींसकती
बनाबैठातुझेहीमैंमिटानेथातुझेआया
नयनसेअबतेरीतस्वीरओझलहोनहींसकती
मेरीधड़कनतेरीछनछनहैसीनेमेंतेरीपायल
वोपायलजोनहींधड़केवोपायलहोनहींसकती
करूँँगाक्यामिलीभीगरमुझेदुनियातेरेबदले
तेरेबिनज़िंदगानीयेमुकम्मलहोनहींसकती
  - Divya 'Kumar Sahab'
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