yaad aankhoñ ko ghatta karti rahi | याद आँखों को घटा करती रही

  - Divya 'Kumar Sahab'
यादआँखोंकोघटाकरतीरही
रातदिनबे-सब्रसाकरतीरही
कामक्याजानेदवाकरतीरही
परअसरतोबसदु'आकरतीरही
इनदियोंकामसअलाजबभीउठा
फ़ैसलाइनकाहवाकरतीरही
रोपड़ाहैआसमाँफिरआजक्यूँ
बातक्याइससेेधराकरतीरही
जिस्मतोयेसोगयाथारातमें
रातभरयेरूहक्याकरतीरही
कटरहेहैंपेड़दौलतकेलिए
शाख़येफिरभीभलाकरतीरही
  - Divya 'Kumar Sahab'
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