aankh ka qasoor aarzoo ke qafile hue | आँख का क़सूर आरज़ू के क़ाफ़िले हुए

  - Divya 'Kumar Sahab'
आँखकाक़सूरआरज़ूकेक़ाफ़िलेहुए
अश्कसेकीहैदु'आयेहोंठहैंसिलेहुए
तूनज़रइधरकरेतोदिलमेराधड़कउठे
होगयादशकयहाँजिगरमेराहिलेहुए
रोमरोमयेरहापुकारबसतुझेयहाँ
साँसमेंयेरागतेरेहैंघुलेमिलेहुए
दूरक्यूँहुएभलामैंसोचतायहीरहा
माफ़करभुलाभीदेजोदरमियाँगिलेहुए
करदियामुझेजुदाकुछकहाकुछसुना
एकवक़्तमेंयहाँहज़ारसिलसिलेहुए
जबतेरेक़दमपड़ेतोदिलमेराचमनहुआ
हरतरफ़तेरेलिएगुलाबहैंखिलेहुए
  - Divya 'Kumar Sahab'
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